नई दिल्ली, 11 नवम्बर (अशोक “अश्क”) रूस दुनिया भर में अपना सैन्य और राजनीतिक दबदबा बढ़ाने में जुटा हुआ है और इसके लिए अपने सहयोगी देशों को परमाणु सक्षम हाईटेक हथियार उपलब्ध करा रहा है। इसी क्रम में बेलारूस भी रूस का करीबी सहयोगी माना जाता है। हाल ही में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने रूस की परमाणु से चलने वाली शक्तिशाली मिसाइल बुरेवेस्टनिक को लेकर बयान दिया।

उन्होंने साफ किया कि बेलारूस को रूस की ओरेशनिक मिसाइल पहले से ही मिल चुकी है, जो बहुत शक्तिशाली और लंबी दूरी की है। इस कारण बेलारूस को बुरेवेस्टनिक या पोसाइडन जैसी अन्य परमाणु मिसाइलों की आवश्यकता नहीं है। लुकाशेंको ने बेलारूस को मुख्य समुद्री पहुंच से दूर बताते हुए वन भूमि क्षेत्र में संचालन संबंधी सीमाओं का हवाला भी दिया।
इस बीच, यूक्रेन पर लगातार जारी रूसी हमले और रूस-बेलारूस युद्ध अभ्यास ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। नाटो देशों की नजर रूस पर लगातार बनी हुई है। रूस यूक्रेन को निशाने पर रखे हुए है, जिसकी वजह नाटो की तरफ से यूक्रेन को अपना हिस्सा बनाने की कोशिश मानी जा रही है।
हालांकि, यूक्रेन अभी तक नाटो में शामिल नहीं हो पाया है, लेकिन यदि ऐसा होता है तो रूस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। रूस और नाटो के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और बेलारूस की मिसाइल नीति इस जटिल स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

