नई दिल्ली, 8 सितम्बर (अशोक “अश्क”) यूरोप में जॉब करना लाखों भारतीयों का सपना होता है। यूरो में मोटी तनख्वाह, शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर, साफ हवा और बेस्ट वर्क-लाइफ बैलेंस ये सब कुछ ऐसा है, जो दुनिया भर के प्रोफेशनल्स को यूरोप की ओर खींचता है। लेकिन इसी सपने के पीछे कभी-कभी ऐसी सच्चाई छिपी होती है, जो भावनात्मक रूप से बहुत कुछ तोड़ देती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर एक भारतीय प्रोफेशनल ने अपनी पोस्ट में यूरोप में मिलने वाली सुविधाओं के बावजूद अपने अकेलेपन, अस्वीकृति और वापसी की इच्छा की भावुक कहानी साझा की है।

इस व्यक्ति ने बताया कि वह पिछले 4-5 सालों से यूरोप में रह रहा है, जहां उसके पास अच्छी सैलरी वाली जॉब है और एक करोड़ रुपये से ज्यादा की सेविंग्स भी। उसने साफ तौर पर लिखा कि फाइनेंशियल स्थिति मजबूत है, माता-पिता भी आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, लेकिन फिर भी वह खुद को वहां एक ‘अजनबी’ जैसा महसूस करता है।
उसने लिखा, “मैं यहां की सैलरी, साफ हवा और अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर को पसंद करता हूं, लेकिन मैं अंदर से खुश नहीं हूं। मैं अकेला रहता हूं, स्मोकिंग की आदत लग गई है और सर्दियों में तनाव चरम पर होता है। मेरे दोस्त हैं, लेकिन कोई करीबी नहीं है। हर साल भारत आता हूं और वहीं अच्छा लगता है।”
प्रोफेशनल ने यह भी बताया कि वह जल्द ही भारत में ट्रांसफर की योजना बना रहा है, लेकिन उसके कुछ रिश्तेदार उसे रोक रहे हैं। उनका तर्क है कि भारत में वर्क-लाइफ बैलेंस अच्छा नहीं होता और वहां उसे पछताना पड़ सकता है। फिर भी, उसका मानना है कि यूरोप की सुविधाओं के बावजूद जीवन अधूरा है।
बताया क्या वजह है:
- दोयम दर्जे का नागरिक होने का एहसास: उसने कहा कि चाहे आप यूरोप में कितने भी साल बिता लें, वहां की त्वचा की रंगत आधारित सामाजिक सोच से आप कभी ‘अपना’ महसूस नहीं कर सकते।
- संस्कृति और पारिवारिक दूरी: उसे डर है कि अगर उसके बच्चे यूरोप में बड़े हुए, तो वे भारतीय संस्कृति और मूल्यों से दूर हो जाएंगे।
- रिश्तों में दूरी: यूरोप में रहकर उसने महसूस किया कि वह भारत के अपने करीबी रिश्तों से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है।
- बढ़ता नस्लवाद: उसने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और यूरोप में नस्लभेदी हमलों की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जो असुरक्षा और डर का माहौल पैदा करती हैं।
पोस्ट में उसने अपनी भावनाओं को बयां करते हुए कहा, “मेरे पास अच्छा पैसा और खाली समय है, लेकिन इसका क्या फायदा, अगर दिन स्मोकिंग और पब में समय बिताने में गुजरें? यही सोचकर मैं अगले 6 महीने में भारत लौटने की प्लानिंग कर रहा हूं।”
इस पोस्ट ने हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सिर्फ पैसा और सुविधाएं ही सब कुछ नहीं होती अपनापन, रिश्ते और सामाजिक जुड़ाव भी जीवन का एक अहम हिस्सा है।

