नई दिल्ली, 8 सितम्बर (अशोक “अश्क”) जब चीन ने हाल ही में अपने विक्ट्री डे परेड में इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल DF-5C समेत अपनी खतरनाक सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन किया, तब पूरी दुनिया सकते में आ गई। लेकिन दूसरी ओर भारत में स्थिति उलट है। भारतीय वायुसेना इस वक्त एक गंभीर संकट से गुजर रही है लड़ाकू विमानों की भारी कमी है।

वर्तमान में एयरफोर्स के पास 29 फाइटर स्क्वायड्रन हैं, जबकि उसे जरूरत है 42 स्क्वायड्रन की। एक स्क्वायड्रन में 18 फाइटर जेट होते हैं, यानी देश को इस समय करीब 250 अतिरिक्त फाइटर विमानों की तत्काल आवश्यकता है। हालात और बिगड़ते जा रहे हैं क्योंकि सितंबर में मिग-21 के दो स्क्वायड्रन रिटायर होने वाले हैं।
इस संकट से उबरने के लिए भारत सरकार और वायुसेना ने स्वदेशी तेजस Mark-1A फाइटर जेट्स पर भरोसा जताया है। 2021 में सरकार ने 83 तेजस Mark-1A विमानों के लिए 46,000 करोड़ रुपये की डील को मंजूरी दी थी। इसके बाद अगस्त 2025 में 97 और विमानों की खरीद को हरी झंडी दी गई, जिसकी लागत लगभग 62,000 करोड़ रुपये है।
हालांकि, 2021 में की गई डील के बावजूद अभी तक एक भी तेजस Mark-1A विमान वायुसेना को नहीं मिल सका है। HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) अब अक्टूबर 2025 में दो विमान देने की बात कर रही है।
इस देरी के पीछे सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी कंपनी GE द्वारा 404 इंजन की धीमी आपूर्ति। डील के अनुसार इंजन की सप्लाई मार्च 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन पहला इंजन भारत को अप्रैल-मई में मिला और अब तक केवल दो इंजन ही मिल पाए हैं। अगस्त में GE ने वादा करने के बावजूद एक भी इंजन नहीं भेजा। हालांकि कंपनी ने सितंबर में 4-5 इंजन भेजने का भरोसा दिया है, लेकिन इस पर भरोसा करना मुश्किल है।
HAL तेजस के एडवांस वर्जन Mark-2 पर भी काम कर रही है, जिसमें GE के ही 414 इंजन लगेंगे। यह विमान राफेल की टक्कर का माना जा रहा है। लेकिन इस प्रोजेक्ट की पहली उड़ान 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक टल गई है। पहले यह 2026 के मध्य में होने वाली थी।
एयरफोर्स चीफ मार्शल एपी सिंह भी तेजस प्रोग्राम में देरी पर सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने कहा कि HAL पिछले 40 वर्षों से तेजस पर काम कर रही है, लेकिन अभी तक सिर्फ 40 विमान ही डिलीवर कर पाई है।
हालांकि HAL ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाई है और अब हर साल 24-30 फाइटर जेट्स बनाने में सक्षम है, लेकिन जब तक GE की सप्लाई सुचारु नहीं होती, तब तक हालात में तेजी से सुधार संभव नहीं।
भारत को चीन और पाकिस्तान जैसी चुनौतियों के बीच अपनी वायु ताकत को मजबूत करने की सख्त जरूरत है, वरना रणनीतिक असंतुलन का खतरा और गहरा हो सकता है।

