चंडीगढ़, 26 सितंबर (अशोक “अश्क”) भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए आज का दिन भावनाओं से भरा ऐतिहासिक क्षण बन गया, क्योंकि 60 से अधिक वर्षों तक सेवा देने वाले लड़ाकू विमान मिग-21 ने आज अपनी आखिरी उड़ान भरी। वायुसेना के इस पुराने लेकिन भरोसेमंद योद्धा को आधिकारिक रूप से रिटायर कर दिया गया।

इस मौके को खास बनाने के लिए चंडीगढ़ एयरबेस पर विशेष आयोजन किया गया, जहां अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से लौटे भारत के पहले गगनयान मिशन पायलट शुभांशु शुक्ला भी मौजूद रहे। शुभांशु ने भावुक होते हुए कहा, “मिग-21 का कॉकपिट मेरे लिए एक शिक्षक जैसा रहा है। मैंने 2007 से 2017 तक इसमें उड़ान भरी है। यह जेट मेरे जीवन का हिस्सा रहा है और इसकी आखिरी उड़ान देखना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।”
शुभांशु ने आगे कहा कि वह खुद एक बार फिर मिग-21 के कॉकपिट में बैठकर उड़ान भरना चाहते थे, “लेकिन अब वह संभव नहीं है। फिर भी, उन साथियों से मिलकर खुशी हो रही है जिनके साथ मिग-21 की यादें जुड़ी हैं।”
मिग-21 की आखिरी उड़ान को एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्क्वाड्रन के कॉल साइन ‘बादल’ के साथ संचालित किया। उनके साथ स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा भी इस ऐतिहासिक उड़ान का हिस्सा बनीं। यह उड़ान चंडीगढ़ एयरबेस से भरी गई वही स्थान जहां 1963 में मिग-21 ने भारतीय वायुसेना में अपनी पहली उड़ान भरी थी।
सोवियत संघ में बने मिग-21 को 1960 के दशक में भारतीय वायुसेना ने अपनाया था और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इसका लाइसेंस उत्पादन किया। इसका कंपैक्ट डिजाइन, तेज गति, और उत्कृष्ट क्लाइम्ब-रेट इसे दुश्मन के लिए डर का प्रतीक बनाते थे।
मिग-21 ने 1971 युद्ध, करगिल संघर्ष, और बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे अभियानों में अपनी शौर्यपूर्ण भूमिका निभाई थी।
62 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद, आज जब मिग-21 ने आखिरी बार भारतीय आसमान को चूमा, तो हर आंख नम और हर सैनिक गर्व से भरा हुआ था।

