नई दिल्ली, 5 सितम्बर (अशोक “अश्क”) अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने एक चौंकाने वाला बयान देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा है कि अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच की कभी गहरी रही निजी दोस्ती अब समाप्त हो चुकी है। बोल्टन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।

ब्रिटिश मीडिया पोर्टल एलबीसी को दिए गए एक साक्षात्कार में बोल्टन ने ट्रंप की विदेश नीति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को नेताओं के साथ अपनी व्यक्तिगत दोस्ती के आधार पर आंकते हैं, जो कि एक खतरनाक दृष्टिकोण है। बोल्टन ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि ट्रंप की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अच्छी बनती है, तो वे मान लेते हैं कि अमेरिका और रूस के बीच संबंध भी मजबूत हैं। लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट होती है।
बोल्टन ने कहा कि ठीक यही गलती भारत के मामले में भी हुई। पहले ट्रंप और मोदी के बीच अच्छी निजी केमिस्ट्री थी, लेकिन अब वह खत्म हो चुकी है। इसके पीछे मुख्य कारण ट्रंप प्रशासन की नीतियां हैं, जिन्होंने भारत-अमेरिका रिश्तों को दशकों पीछे धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि खासकर भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ ने नई दिल्ली को रूस और चीन के नजदीक ला दिया है।
बोल्टन के अनुसार, यह ट्रंप की एक बड़ी रणनीतिक भूल थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने वर्षों तक यह कोशिश की कि भारत रूस की छाया से बाहर निकले और चीन को अपनी प्रमुख सुरक्षा चुनौती के रूप में देखे। लेकिन ट्रंप की टैरिफ-नीतियों और भारत के प्रति कठोर रुख ने इस दिशा में हुई वर्षों की मेहनत को नष्ट कर दिया।
बोल्टन ने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी देश के नेता के साथ व्यक्तिगत संबंध, उस देश की व्यापक विदेश नीति की सफलता की गारंटी नहीं होते। उनका मानना है कि चीन ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए खुद को भारत के लिए अमेरिका और ट्रंप के विकल्प के रूप में पेश किया है।
हालांकि बोल्टन ने यह भी कहा कि यह स्थिति पूरी तरह स्थायी नहीं है और इसमें सुधार हो सकता है, लेकिन वर्तमान समय भारत-अमेरिका रिश्तों के लिए बहुत ही नाजुक और चुनौतीपूर्ण है। उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि आने वाले समय में अमेरिका की विदेश नीति, विशेषकर भारत के संदर्भ में, नए समीकरणों की मांग कर सकती है।

