नई दिल्ली, 04 नवम्बर (अशोक “अश्क”) भारतीय वायु सेना वर्तमान में फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी से जूझ रही है, लेकिन आने वाले वर्षों में यह स्थिति पूरी तरह बदल सकती है। भारत सरकार एक ऐसी महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत देश में ही अत्याधुनिक फाइटर जेट इंजन बनाए जाएंगे। इस कदम से न केवल आत्मनिर्भर भारत मिशन को नई गति मिलेगी, बल्कि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता भी समाप्त हो जाएगी।

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत 65,400 करोड़ रुपये के निवेश से इस मेगा प्रोजेक्ट को अमल में ला रहा है। लक्ष्य है कि 2035 तक भारत फाइटर जेट इंजन निर्माण में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन जाए। इन इंजनों का उपयोग तेजस Mk2, एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और भविष्य के मानवरहित लड़ाकू विमानों (UCAV) में किया जाएगा। योजना के तहत अगले एक दशक में 1,100 स्वदेशी इंजन भारत में बनाए जाने की तैयारी है।
यह मिशन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) के डायरेक्टर जनरल एस.वी. रमना मूर्ति की अगुवाई में आगे बढ़ रहा है। मूर्ति ने कहा कि “एक मजबूत इकोसिस्टम” बनाने पर ध्यान है, जिसमें सरकारी अनुसंधान, निजी उद्योग और वैश्विक साझेदारी को जोड़ा जा रहा है।
भारतीय वायु सेना को 2035 तक 450 नए फाइटर जेट मिलने की संभावना है, जो स्वदेशी इंजनों से लैस होंगे। इससे भारत की रक्षा क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास तीनों में बढ़ोतरी होगी।
योजना के तहत पहला प्रोजेक्ट तेजस Mk2 लड़ाकू विमान है। इसके लिए भारत और अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के बीच F414 इंजन को लेकर बातचीत चल रही है, जिसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का भी प्रस्ताव शामिल है। साथ ही, वर्षों से ठंडे पड़े कावेरी इंजन प्रोग्राम को फिर से सक्रिय किया गया है, जिसका अपग्रेडेड संस्करण भारत के अनमैन्ड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को शक्ति देगा।
इसके अलावा, पांचवीं पीढ़ी से आगे के स्टील्थ फाइटर AMCA के लिए भारत GE, फ्रांस की सफ्रान और ब्रिटेन की रॉल्स रॉयस के साथ संयुक्त रूप से नया इंजन विकसित करने पर चर्चा कर रहा है। इसका पहला प्रोटोटाइप 2028 तक आने की संभावना है। यह परियोजना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

