नई दिल्ली, 28 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) भारत के विमानन इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पहली बार देश में ही यात्री विमान (Passenger Aircraft) बनाने का रास्ता साफ हो गया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के साथ इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां भारत में ही आधुनिक SJ-100 जेट का निर्माण करेंगी।

यह करार न केवल भारत के लिए ऐतिहासिक है, बल्कि यह अमेरिका के लिए एक और रणनीतिक झटका माना जा रहा है। SJ-100 दो इंजनों वाला नैरो-बॉडी जेट है, जिसे फिलहाल 16 से अधिक कमर्शियल एयरलाइंस ऑपरेट कर रही हैं। अब तक दुनिया भर में इस मॉडल के 200 से ज्यादा विमान बनाए जा चुके हैं।
HAL का कहना है कि भारत में निर्मित SJ-100 विमान उड़ान योजना (UDAN Scheme) के तहत छोटी दूरी की हवाई सेवाओं को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा। यह प्रोजेक्ट भारत के रीजनल कनेक्टिविटी नेटवर्क को मजबूत बनाने के साथ-साथ देश की एविएशन इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
समझौते के तहत HAL को घरेलू बाजार के लिए SJ-100 जेट्स के निर्माण का विशेष अधिकार दिया गया है। कंपनी ने बताया कि यह साझेदारी दोनों संगठनों के बीच दशकों पुराने भरोसे और तकनीकी सहयोग का परिणाम है। उल्लेखनीय है कि भारत में आखिरी बार यात्री विमान AVRO HS-748 का निर्माण हुआ था, जिसका उत्पादन 1961 से 1988 तक चला था।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले 10 वर्षों में भारत को ऐसे नैरो-बॉडी यात्री विमानों की कम से कम 200 इकाइयों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, हिंद महासागर क्षेत्र के देशों में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों के लिए करीब 350 अतिरिक्त विमानों की भी जरूरत पड़ेगी।
HAL का कहना है कि यह प्रोजेक्ट भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे न केवल देश में तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निजी क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।
साथ ही, SJ-100 के निर्माण से सीधे और परोक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को वैश्विक नागरिक उड्डयन मानचित्र पर एक मजबूत निर्माता राष्ट्र के रूप में स्थापित करेगी।

