नई दिल्ली, 20 नवम्बर (अशोक “अश्क”) भारत और रूस के संबंध इन दिनों अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच नई दिशा लेते दिखाई दे रहे हैं। पश्चिमी देश लगातार भारत से आग्रह कर रहे हैं कि वह रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करे, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रूसी तेल का आयात जारी रखे हुए है। इसी मुद्दे पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ भी लगाया था, जिससे तनाव की स्थिति बनी। हालांकि, इन परिस्थितियों के बावजूद रूस ने भारत के साथ ऊर्जा साझेदारी को मजबूती देने का संकेत दिया है।

भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने समाचार एजेंसी TASS को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि तमाम पश्चिमी प्रतिबंधों और बाधाओं के बावजूद रूस, भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि रूस भारत को ऊर्जा संसाधनों की खरीद के लिए आकर्षक और लाभकारी सौदे उपलब्ध कराता रहेगा। अलिपोव ने रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी प्रमुख रूसी तेल कंपनियों पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों का ज़िक्र करते हुए स्वीकार किया कि इन प्रतिबंधों का असर सप्लाई चेन पर पड़ सकता है, लेकिन भारत रूस की प्राथमिकता बना रहेगा। उनके अनुसार, रूस भविष्य में भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहेगा।
रूस के राजदूत ने पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर डाले जा रहे दबाव को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि भारत ने पश्चिम द्वारा संबंधों को कमजोर करने और वैश्विक मुद्दों पर अपनी स्थिति थोपने के प्रयासों का सशक्त रूप से मुकाबला किया है। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को दरकिनार कर लगाए गए एकतरफा अवैध प्रतिबंधों को स्वीकार नहीं करता। अलिपोव के मुताबिक, ऐसे प्रतिबंध वैश्विक व्यापार और वित्तीय प्रणालियों में विश्वास को कमजोर करते हैं, जिससे स्वतंत्र देश वैकल्पिक प्रणाली बनाने की दिशा में बढ़ते हैं। उन्होंने ब्रिक्स और एससीओ जैसे मंचों के भीतर नए अवसरों की संभावना जताई।
अलिपोव ने बताया कि प्रतिबंधों के बावजूद रूस-भारत सहयोग नए क्षेत्रों में विस्तारित हुआ है। अमेरिकी टैरिफ दबाव के बाद रूसी बाजार भारतीय समुद्री उत्पादों और अन्य वस्तुओं के लिए नए अवसर प्रदान कर सकता है। संयुक्त उर्वरक उत्पादन में भी दोनों देश संभावनाएं देख रहे हैं।
इसके साथ ही राजदूत अलिपोव ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी शिखर सम्मेलन को लेकर उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह बैठक ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक चुनौतियों से जुड़े क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि पुतिन-मोदी शिखर सम्मेलन के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

