नई दिल्ली, 16 सितम्बर (अशोक “अश्क”) भारत सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 16,000 विदेशी नागरिकों को देश से निष्कासित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन सभी विदेशी नागरिकों को विभिन्न राज्यों की पुलिस और डिटेंशन केंद्रों में हिरासत में रखा गया है। सरकार का यह कदम ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ अभियान के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य देश में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।

गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की विस्तृत रिपोर्टों के आधार पर की जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन विदेशी नागरिकों की संलिप्तता संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क में पाई गई है, जो भारत को ड्रग ट्रांजिट हब बनाने की कोशिश कर रहा था। इनमें बांग्लादेश, म्यांमार, मलेशिया, फिलीपींस, घाना और नाइजीरिया जैसे देशों के नागरिक प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इन विदेशी नागरिकों पर मादक पदार्थों की तस्करी, उनके परिवहन और अन्य आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने के गंभीर आरोप हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के वर्षों में महानगरों और तटीय इलाकों में इनकी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। सरकार का मानना है कि यह नेटवर्क न सिर्फ युवाओं को नशे की ओर धकेल रहा था, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन रहा था।
गृह मंत्रालय ने सभी संबंधित एजेंसियों को इन विदेशी नागरिकों की सूची सौंप दी है और अब चरणबद्ध तरीके से इनकी डिपोर्टेशन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नए आप्रवासन कानूनों के तहत इन नागरिकों को उनके मूल देशों में भेजा जाएगा। डिपोर्टेशन से पहले इन्हें डिटेंशन केंद्रों में रखा जाएगा, जहां कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में आयोजित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के द्वितीय राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों और मुख्यमंत्रियों से ड्रग तस्करी को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखने की अपील की थी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत में अवैध रूप से घुसकर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के अंतर्गत यह कार्रवाई ऐतिहासिक मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह कदम भारत की ड्रग आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने में निर्णायक साबित होगा और साथ ही अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया को सख्त संदेश देगा कि भारत अब ड्रग तस्करी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के मूड में है।
यह व्यापक अभियान देशभर में चल रहे ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ मिशन को और सशक्त बनाएगा तथा देश को सुरक्षित और स्वस्थ रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

