नई दिल्ली, 30 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) भारत की सीमा से सटे तिब्बत क्षेत्र में चीन तेजी से सैन्य निर्माण कर रहा है। नई सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन ने कम से कम दो ऐसे ठिकाने बनाए हैं, जहां बंकरों से मिसाइलें लॉन्च की जा सकती हैं। इन ठिकानों का पैटर्न आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम जैसा है, जिससे चीन अपनी रक्षा और हमले दोनों क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।

वॉर जोन की रिपोर्ट के अनुसार, भू-स्थानिक खुफिया फर्म ऑलसोर्स एनालिसिस ने अगस्त और सितंबर के बीच ली गई प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर इन ठिकानों की पहचान की। बाद में मैक्सार टेक्नोलॉजीज की सितंबर की तस्वीरों से इंडिया टुडे की रिपोर्ट ने भी इसकी पुष्टि की। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये ठिकाने चीन के HQ-9 लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम के लिए तैयार किए गए हैं, जो रूस के S-300P सीरीज का एडवांस वर्जन है। पाकिस्तान भी इसी सिस्टम का उपयोग करता था, जिसे भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में नष्ट कर दिया था।
HQ-9 मिसाइल सिस्टम ट्रक-माउंटेड लॉन्चर (TEL) से वर्टिकल मिसाइल दागता है। सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे रिट्रैक्टेबल रूफ वाले बंकर इस डिजाइन से मेल खाते हैं। कुछ तस्वीरों में छतें खुली दिखीं, जिनके अंदर ऐसे ऑब्जेक्ट्स नजर आए जो HQ-9 लॉन्चर जैसे प्रतीत होते हैं।
पहला ठिकाना तिब्बत के गार काउंटी में और दूसरा पैंगोंग झील (पैंगोंग त्सो) के पूर्वी छोर के पास स्थित है। ये दोनों ही लोकेशन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के काफी निकट हैं, जहां हाल के वर्षों में भारत और चीन की सेनाओं के बीच कई बार टकराव हो चुका है। गार काउंटी वाला ठिकाना भारत के एक एयरबेस के सामने स्थित बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये ठिकाने चीन की “एंटी-एक्सेस और एरिया डिनायल (A2/AD)” क्षमता को बढ़ा सकते हैं, जिससे PLA अब भारतीय विमानों, ड्रोन या मिसाइलों को LAC पार करने से पहले ही निशाना बना सकेगा। हालांकि ये ठिकाने भारतीय स्ट्राइक रेंज में भी आते हैं, इसलिए चीन ने इन्हें कंक्रीट परतों, किले-जैसी दीवारों और भूमिगत कमांड सेंटर से सुरक्षित किया है।
इससे पहले 2017 और 2022 में भी सैटेलाइट रिपोर्ट्स में चीन द्वारा दक्षिण चीन सागर में इसी तरह की संरचनाएं बनाते हुए देखी गई थीं। अब वही पैटर्न भारत सीमा तक पहुंच गया है, जिससे संकेत मिलता है कि चीन अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को किले की तरह मजबूत कर रहा है।

