नई दिल्ली, 7 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम टिप्पणी में कहा कि “भारत हर तरह के लोगों के लिए स्वर्ग बन गया है। कोई भी आता है और यहीं रुक जाता है।” यह टिप्पणी कोर्ट ने गोवा में एक रूसी महिला के साथ रह रहे इजरायली नागरिक की याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें उसने अपनी दो कथित नाबालिग बेटियों को रूस प्रत्यर्पित करने से रोकने की अपील की थी।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने इस याचिका को “तुच्छ और प्रचार के उद्देश्य से प्रेरित” बताते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा, “आप भारत में क्यों हैं? आपकी आजीविका का क्या स्रोत है? आप गोवा में कैसे रह रहे हैं?”

याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि वह उन दो लड़कियों का पिता है, जिन्हें जुलाई में उनकी रूसी मां नीना कुटिना के साथ कर्नाटक के जंगल में एक गुफा से बचाया गया था। तीनों के पास वैध यात्रा या निवास दस्तावेज नहीं थे। बाद में उन्हें विदेशी निरोध केंद्र भेजा गया और 28 सितंबर को रूस प्रत्यर्पित कर दिया गया।
कोर्ट ने गोल्डस्टीन नामक इस इजरायली नागरिक से पूछा कि अगर वह लड़कियों का पिता था, तो “जब वे गुफा में रह रही थीं तब आप कहां थे?” कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “हम आपको भी देश से निर्वासित क्यों न करें?”
गोल्डस्टीन ने खुद को गोवा में रह रहा एक व्यवसायी बताया और कहा कि वह लड़कियों की देखभाल कर रहा था, लेकिन कोर्ट को उसके दावों में कोई सच्चाई नहीं दिखी। अंततः कोर्ट ने याचिका को स्वेच्छा से वापस लेने की अनुमति दी और उसे खारिज कर दिया।
यह मामला भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और उनके अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को दर्शाता है।

