
पटना, 21 दिसम्बर (पटना डेस्क) बिहार के बोधगया स्थित मगध विश्वविद्यालय एक बार फिर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। परीक्षा विभाग से सात चेकों के जरिए कुल 5 लाख 25 हजार रुपये की फर्जी निकासी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि यह रकम पूर्व कुलसचिव (रजिस्ट्रार) और वित्त पदाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर निकाली गई, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

मामले का खुलासा होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने मगध विश्वविद्यालय थाना में एफआईआर दर्ज कराई है। प्रारंभिक जांच में बैंककर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि चेकों पर किए गए हस्ताक्षरों का विधिवत सत्यापन किए बिना ही भुगतान कर दिया गया, जिससे यह फर्जीवाड़ा आसानी से अंजाम दिया गया। सूत्रों के अनुसार, चेकों पर तत्कालीन कुलसचिव के नाम से फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे।सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब चेक वित्त पदाधिकारी के नाम से निर्गत थे, तो उनके हस्ताक्षरों का मिलान क्यों नहीं किया गया। इसके अलावा, पूर्व एमबीए निदेशक के नाम पर भी राशि निकासी की बात सामने आने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि इस पूरे प्रकरण में संगठित तरीके से गड़बड़ी की गई।जांच के दायरे में विश्वविद्यालय के दो कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आंतरिक जांच के साथ-साथ पुलिस भी सक्रिय है और बैंक रिकॉर्ड, चेक विवरण तथा हस्ताक्षर सत्यापन के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। फिलहाल पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन इस घोटाले से उबरने और सच्चाई सामने लाने में जुटा है।

