
मोतिहारी, 04 फरवर (निज संवाददाता) पूर्वी चंपारण जिले में ‘पुलिस मित्र’ की बहाली के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक फर्जी एनजीओ ने सरकारी नौकरी और 20 हजार मासिक वेतन का झांसा देकर कम से कम 41 बेरोजगार युवकों से लाखों रुपये की ठगी कर ली। मामला उजागर होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।जिले के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोटवा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है और पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

प्रशिक्षु आईपीएस के नेतृत्व में उक्त SIT, का गठन किया गया है। जिसमें पुलिस नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।ठगी के इस संगठित नेटवर्क की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने SIT की कमान एक प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी को सौंपी है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। जांच केवल एनजीओ संचालकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिले के कई थानों के थानेदारों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।पीड़ित युवकों के आवेदन पर केस दर्ज कर लिया गया है। एनजीओ संचालकों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। यदि किसी थानेदार या पुलिसकर्मी की संलिप्तता पाई जाती है,तो उसके खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एसपी के इस बयान के बाद से पूरे जिले के पुलिस महकमे में खलबली मची हुई है और कई थानों में अंदरूनी स्तर पर जवाब-तलब की तैयारी शुरू हो गई है। वही अरेराज की महिला थानेदार से अरेराज एसडीपीओ रवि कुमार ने जबाब मांगा है। बता दें कि कुछ थानों में स्टेशन डायरी (सनहा) में फर्जी तरीके से ‘पुलिस मित्रों’ की ज्वाइनिंग दर्ज की गई,जिससे बेरोजगार युवकों को यह पूरा खेल सरकारी प्रक्रिया जैसा प्रतीत हो सके।-मुजफ्फरपुर में ट्रेनिंग,थानों में आईडी कार्ड वितरणजालसाजों ने ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया है। युवकों को पहले मुजफ्फरपुर ले जाकर ट्रेनिंग दिलाई गई,फिर थाना परिसरों में ही आईडी कार्ड वितरित किए गए। जिसमें अरेराज,फेनहारा, ढाका, चिरैया, घोड़ासहन समेत कई थानों में इन कथित ‘पुलिस मित्रों’ की तैनाती की चर्चा रही। हैरानी की बात यह है कि चौकीदार और दफादारों के बेटों से भी मोटी रकम वसूली गई।-50 हजार से 1 लाख तक की हुई वसूली,डिजिटल भुगतान का इस्तेमालप्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रत्येक युवक से 50 हजार से 1 लाख तक वसूले गए। रकम लेने के लिए डिजिटल पेमेंट (पे-फोन/ऑनलाइन ट्रांजैक्शन) का भी सहारा लिया गया, जिसकी विस्तृत जांच अब SIT कर रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस परिसरों का उपयोग कर इस तरह का फर्जीवाड़ा बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं था।पुलिस की भूमिका पर भी जांच हो रही है। एसपी ने कहा कि “दोषी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।

