
बक्सर, 31 जनवरी (विक्रांत) यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन, 2026 के समर्थन और उसे सख्ती से लागू कराने की मांग को लेकर इंकलाबी नौजवान सभा और छात्र संगठन आइसा ने डुमरांव में जोरदार मार्च निकाला। यह मार्च डुमरांव थाना परिसर से शुरू होकर शहर की विभिन्न सड़कों से गुजरता हुआ गढ़ चौक पहुंचा, जहां इसे एक विशाल जनसभा में तब्दील कर दिया गया।
मार्च और सभा में बड़ी संख्या में छात्र-नौजवानों की भागीदारी ने माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया।सभा को संबोधित करते हुए डुमरांव के पूर्व विधायक और इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन का घोषित उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान, दिव्यांगता के आधार पर होने वाले हर तरह के भेदभाव को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि यह कोई छिपी हुई सच्चाई नहीं है कि देश के विश्वविद्यालयों में जाति उत्पीड़न लगातार बढ़ रहा है।
यूजीसी के ही आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।डॉ. सिंह ने रोहित वेमुला, पायल तडवी और दर्शन सोलंकी की मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि शैक्षणिक संस्थान भी सामाजिक अन्याय से अछूते नहीं हैं। 2012 में जारी यूजीसी दिशानिर्देश इस अन्याय को रोकने में पूरी तरह विफल रहे, इसलिए 2026 के नए नियम एक जरूरी और ऐतिहासिक कदम हैं।

उन्होंने कहा कि नए नियमों में ओबीसी छात्रों को स्पष्ट रूप से इक्विटी सुरक्षा के दायरे में लाया गया है, जो लंबे समय से लंबित मांग थी। कुछ सवर्ण समूहों द्वारा “मेरिट के खतरे” का तर्क विशेषाधिकार खोने के डर से प्रेरित है। समानता कोई रियायत नहीं, बल्कि अधिकार है।

मार्च में इनौस के जिला संयोजक राजदेव सिंह, धर्मेंद्र सिंह यादव, बीरन यादव, सोनू यादव, धुरान यादव, सुरेंद्र प्रसाद, हरेंद्र मौर्या, अरविंद सिंह, धनई राम, कन्हैया पासवान, नासिर हसन, सुरेश राम, कृष्णा राम, कृष्णा यादव सहित सैकड़ों छात्र-नौजवान शामिल हुए।

