
पटना, 02 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले एनडीए खेमे में सियासी हलचल तेज हो गई है। 26 फरवरी से नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही सहयोगी दलों ने अपनी दावेदारी खुलकर रखनी शुरू कर दी है। 16 मार्च को खाली हो रही सभी पांच सीटों पर मतदान होना है, लेकिन उससे पहले सीट बंटवारे को लेकर खींचतान चरम पर पहुंच गई है।एनडीए के दो प्रमुख सहयोगी—उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी—ने बीजेपी को उसके पुराने वादे याद दिलाए हैं। वहीं चिराग पासवान ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

रविवार को पटना में उन्होंने लोजपा (रामविलास) के 19 विधायकों के साथ अहम बैठक कर सियासी तापमान और बढ़ा दिया।बिहार कोटे से खाली हो रही पांच सीटों में से एक सीट उपेंद्र कुशवाहा की है। 2024 के लोकसभा चुनाव में काराकाट से हार के बाद बीजेपी ने उन्हें अपने कोटे से राज्यसभा भेजा था। कुशवाहा का दावा है कि विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने एक राज्यसभा और एक एमएलसी सीट देने का वादा किया था। अब वे उसी वादे के आधार पर दोबारा दावा ठोक रहे हैं।इधर, जीतन राम मांझी ने भी गया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि 2024 के आम चुनाव से पहले उनकी पार्टी को दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट देने का आश्वासन मिला था, लेकिन उन्हें सिर्फ एक लोकसभा सीट मिली। राज्यसभा का वादा अब तक अधूरा है।

हालांकि उन्होंने साफ किया कि वे दबाव नहीं बना रहे, बल्कि अपनी मांग रख रहे हैं।चिराग पासवान की बैठक के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि लोजपा (रामविलास) भी एक सीट पर दावा कर सकती है। हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बीजेपी की चुप्पी के बीच एनडीए के भीतर मचे इस घमासान ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है।

