
बक्सर, 16 मार्च (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में 16 से 18 मार्च तक आयोजित राष्ट्रीय किसान मेले में इस बार डुमरांव स्थित कृषि कॉलेज के वनबकरी (नीलगाय) अनुसंधान केंद्र की वनबकरी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी रही। मेले में पहुंचे किसान, वैज्ञानिक और अतिथि वनबकरी के व्यवहार और उसके पालतू बनने की संभावनाओं को देखकर हैरान रह गए।
वनबकरी अनुसंधान केंद्र की ओर से मुख्य अनुसंधानकर्ता डॉ. सुदय प्रसाद, प्राचार्य डॉ. पारसनाथ और वैज्ञानिक डॉ. सी. एस. प्रभाकर के नेतृत्व में वनबकरी को मेले में प्रदर्शित किया गया। स्टॉल पर मौजूद वनबकरी के खान-पान, स्वभाव और गतिविधियों का आगंतुकों ने बारीकी से अवलोकन किया।राष्ट्रीय किसान मेले के मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री शहनवाज हुसैन और विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने भी स्टॉल पर पहुंचकर वनबकरी के व्यवहार को ध्यानपूर्वक देखा।

इस दौरान अनुसंधानकर्ता ने वनबकरी को बिस्किट खिलाया और आवाज देकर पास बुलाया। हैरत की बात यह रही कि वनबकरी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और पास आ गई। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद किसान और अतिथि चकित रह गए।डुमरांव स्थित वनबकरी (घोड़परास) अनुसंधान केंद्र के मुख्य अनुसंधानकर्ता डॉ. सुदय प्रसाद ने बताया कि मेले में दो वनबकरी—डुमरी और महिली—को लाया गया था।

उन्होंने बताया कि इन दोनों वनबकरी को सिमरी अंचल के डुमरी गांव और डुमरांव प्रखंड के महिल गांव से पकड़ने के बाद अनुसंधान कार्य शुरू किया गया है।उन्होंने बताया कि अनुसंधान केंद्र में फिलहाल इन दो वनबकरी के अलावा दो छोटे बच्चे भी मौजूद हैं, जिन पर वैज्ञानिक लगातार अध्ययन कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि शोध सफल रहा तो भविष्य में वनबकरी को पालतू बनाने की दिशा में नई संभावनाएं खुल सकती हैं, जिससे किसानों को भी लाभ मिल सकता है।

