नई दिल्ली, 10 अक्तूबर (अशोक “अश्क”) ब्रिटिश इंजीनियरिंग दिग्गज रोल्स-रॉयस ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर देश का पहला इलेक्ट्रिक युद्धपोत विकसित करने की योजना का ऐलान किया है। अगर यह परियोजना सफल होती है, तो भारत न केवल अपनी समुद्री शक्ति को पर्यावरण-अनुकूल बनाएगा, बल्कि चीन और पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से चुनौती भी देगा।रोल्स-रॉयस, जो दुनिया में बेहतरीन इंजनों के लिए जानी जाती है, भारत की रक्षा तकनीकों को भविष्य के लिए तैयार करने में योगदान देना चाहती है।

कंपनी के पास हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक और फुल-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करने की विशेषज्ञता है, जो आधुनिक युद्धपोतों की जरूरतों को पूरा कर सकती है।कंपनी के भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया (डिफेंस) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अभिषेक सिंह के मुताबिक, रोल्स-रॉयस के पास ऐसे उत्पाद और तकनीकी अनुभव हैं जो भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने बताया कि MT30 मरीन गैस टर्बाइन, जो ब्रिटेन के विमानवाहक पोत HMS प्रिंस ऑफ वेल्स में भी इस्तेमाल होता है, बेहद शक्तिशाली और भरोसेमंद इंजन है। यह हर एक 36 मेगावाट बिजली पैदा करता है, जो चार मीडियम-स्पीड डीजल जनरेटर के साथ मिलकर कुल 109 मेगावाट बिजली उत्पादन करता है—जो एक छोटे शहर को बिजली देने के लिए पर्याप्त है।रोल्स-रॉयस की यह साझेदारी भारत को न केवल तकनीकी रूप से मजबूती देगी, बल्कि हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच भारत की समुद्री रणनीतिक क्षमता को भी बढ़ावा देगी। पाकिस्तान के मुकाबले भारत की सैन्य क्षमता में यह एक बड़ा अंतर पैदा कर सकता है।यह पहल भारत के आत्मनिर्भर रक्षा कार्यक्रम और हाई-टेक सैन्य हार्डवेयर के स्वदेशीकरण को बल देती है। यदि भविष्य में जेट इंजन का सह-विकास भी सफल होता है, तो भारत अपनी आयात निर्भरता घटा सकेगा और हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला पर बाहरी हस्तक्षेप को अप्रभावी बना पाएगा।रोल्स-रॉयस के साथ भारत की यह रणनीतिक साझेदारी तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो नौसेना की ताकत को नई परिभाषा देगा।

