दरभंगा (अशोक “अश्क”) शहर का वार्ड नंबर 45 नगर निगम की घोर लापरवाही और अतिक्रमण की मार झेल रहा है। वर्षों से जलनिकासी और पेयजल संकट से जूझ रहे स्थानीय निवासियों का कहना है कि समस्या का कोई स्थायी समाधान अब तक नहीं निकला है। भारी अतिक्रमण के कारण न तो मुख्य सड़क सुरक्षित रही है, न ही नालों की सफाई या निर्माण संभव हो पाया है। परिणामस्वरूप, बारिश होते ही पूरा इलाका तालाब में तब्दील हो जाता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वार्ड 45 की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि शहर के एक बड़े हिस्से की जलनिकासी इसी रास्ते से होती है। इसके बावजूद नगर निगम की ओर से इस इलाके में न तो कोई बड़ा नाला बनाया गया और न ही अतिक्रमण हटाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई की गई। हल्की बारिश में भी गलियों और मुख्य सड़कों पर पानी भर जाता है, जिससे आम लोगों का बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। कई बार सड़क पर खड़े वाहनों के इंजन तक बंद हो जाते हैं।
स्थानीय निवासी दया शंकर झा, देव नारायण झा, रमाशगुण झा, नारायण झा आदि का कहना है कि यह समस्या अब असहनीय हो चुकी है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार वार्ड की मुख्य सड़क 25 से 35 फीट चौड़ी है, लेकिन अतिक्रमण के कारण यह इतनी संकरी हो गई है कि दो वाहन भी आमने-सामने से नहीं गुजर सकते। लहेरियासराय गुमटी ओवरब्रिज के निर्माण कार्य के चलते इस मार्ग पर यातायात का दबाव और अधिक बढ़ गया है।
निवासी अतुल कुमार, भारती कुमारी, सुरेंद्र झा, चंद्रभूषण झा और रविंद्र झा ने नगर निगम पर नाराजगी जताते हुए कहा कि टैक्स तो समय पर वसूला जाता है, लेकिन बदले में नागरिक सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिलता। नल-जल योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन वार्ड नंबर 45 में आज भी पानी की सप्लाई लाइन नहीं बिछाई गई है। इससे यहां पेयजल संकट और अधिक गंभीर होता जा रहा है।
लोगों ने आरोप लगाया कि कई प्रभावशाली लोगों ने नाले के निर्माण को अपने निजी हित में रोक रखा है। विधायक और सांसद से कई बार गुहार लगाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। 15 दिन पूर्व नगर विधायक ने समस्या का जायजा लेने की बात कही थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे लोगों में भारी नाराजगी है।
स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया और जलनिकासी की व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनका कहना है कि वार्ड 45 चूंकि शहर के बाहरी हिस्से में आता है, इसलिए इसे शुरू से ही उपेक्षित रखा गया है।
नगर निगम ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि जलजमाव की स्थिति में दमकल के माध्यम से पानी की निकासी कराई जाती है। पेयजल संकट के समाधान हेतु समय-समय पर वाटर टैंकर भेजे जाते हैं। फिर भी स्थायी समाधान के लिए योजना बनाई जा रही है।

