
पटना, 02 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार में पिछले दस वर्षों से लागू शराबबंदी कानून पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बड़ा बयान देकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। रविवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून का व्यापक रिव्यू होना चाहिए, ताकि इसकी कमियों को पहचानकर इसे और सख्ती से लागू किया जा सके।लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पासवान ने स्पष्ट किया कि रिव्यू की मांग को शराबबंदी हटाने की वकालत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “यह आकलन जरूरी है कि जिस मकसद से कानून बनाया गया था, क्या वह पूरा हो रहा है। अगर नहीं, तो कमियों को दूर कर इसे प्रभावी बनाया जाए।” उनका मानना है कि किसी भी योजना को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी होती है।पासवान ने दोहराया कि उनकी पार्टी शराब की लत के खिलाफ है और सामाजिक रूप से शराबबंदी का विचार सही है। उन्होंने याद दिलाया कि जब नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) सरकार ने शराबबंदी लागू की थी, तब उनकी पार्टी विपक्ष में रहते हुए भी इस फैसले का समर्थन किया था।

हालांकि, उन्होंने राज्य में जहरीली शराब से होने वाली मौतों और कथित ‘होम डिलीवरी’ जैसे मामलों पर चिंता जताई। “अगर आज भी नकली शराब से मौतें हो रही हैं, तो कहीं न कहीं अवैध उत्पादन जारी है। इसका मतलब है कि लागू करने की व्यवस्था में खामियां हैं,” उन्होंने कहा।बजट सत्र के दौरान एलजेपी (आरवी) के विधायक माधव आनंद ने भी शराबबंदी नीति की समीक्षा की मांग उठाई थी। वहीं जेडीयू नेताओं ने कानून पर दोबारा विचार से साफ इनकार किया है, जबकि बीजेपी की ओर से अब तक मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पासवान के बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

