नई दिल्ली, 18 नवम्बर (अशोक “अश्क”) श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में इस साल शुरू हुए एमबीबीएस के पहले बैच के दाखिले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 50 सीटों में से 42 मुस्लिम छात्रों को अलॉट किए जाने पर हिंदू संगठनों ने विरोध जताया है। संस्थान श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित है और राज्य का कोई अनुदान इसमें नहीं मिलता, इसलिए हिंदू संगठन इसका इस्तेमाल अपनी धार्मिक भावनाओं के अनुरूप करने की मांग कर रहे हैं।

वर्तमान में पहले बैच में 36 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है, जिनमें अधिकांश मुस्लिम छात्र हैं। खाली सीटों के लिए फिर से काउंसलिंग की जाएगी। जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन द्वारा दाखिला मेरिट के आधार पर किया जाता है।
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि हिंदू श्रद्धालुओं के सहयोग से बना यह कॉलेज हिंदू छात्रों को प्राथमिकता दे। राष्ट्रीय महामंत्री बजरंग बगड़ा ने पांच नवंबर को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और बोर्ड सदस्यों को पत्र लिखकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार हिंदू दान केवल हिंदू कारणों के लिए उपयोग होना चाहिए।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश सचिव सनक श्रीवत्स ने प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितताओं की गहन जांच की मांग की। सनातन धर्म सभा के प्रधान पुरुषोत्तम दद्दीची ने कहा कि बोर्ड के सभी संस्थानों में 90 प्रतिशत सीटें सनातन समाज के लिए आरक्षित होनी चाहिए।
श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय कटड़ा कैंपस में मांस पर पूरी तरह प्रतिबंध है। मेस और हॉस्टल में कोई मांस या मदिरा नहीं मिलती, और विद्यार्थियों के कैंपस प्रवेश के समय सामान की पूरी जांच की जाती है।
इस विवाद ने संस्थान में धार्मिक और सामाजिक संतुलन, दाखिला प्रक्रिया की पारदर्शिता और हिंदू दान की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

