नई दिल्ली, 01 दिसम्बर (अशोक “अश्क”) संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ठीक पहले देश की सियासत में ‘ड्रामा बनाम डिलीवरी’ को लेकर घमासान छिड़ गया है। मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर तीखा वार करते हुए कहा कि “संसद में चर्चा को गंभीरता से लें। ड्रामा करने के लिए बहुत जगह होती है… यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए।” प्रधानमंत्री ने विपक्ष से अपील की कि पराजय की बौखलाहट छोड़कर राष्ट्र निर्माण के मुद्दों पर सार्थक विमर्श करें और नकारात्मकता को मर्यादा में रखें।

प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी से नाराज़ कांग्रेस ने पलटवार करते हुए पीएम को ही “सबसे बड़ा ड्रामेबाज” बताने से परहेज़ नहीं किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि “प्रधानमंत्री असल मुद्दों से ध्यान भटका रहे हैं। सरकार पिछले 11 वर्षों से संसदीय मर्यादा को रौंद रही है। भाजपा को ड्रामेबाज़ी बंद कर महंगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।”
खरगे ने कहा कि आम आदमी आज कहर झेल रहा है जबकि सत्ता पक्ष सत्ता के अहंकार में डूबा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया में भारी दबाव के कारण बीएलओ लगातार जान गंवा रहे हैं, इसलिए विपक्ष वोट चोरी सहित संवेदनशील मुद्दों को संसद में मजबूती से उठाएगा।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी पीएम मोदी के बयान पर सवाल खड़े करते हुए कहा, “चुनाव की स्थिति, एसआईआर और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर चर्चा की जरूरत है। जनता के सवाल उठाना कोई ड्रामा नहीं है।”
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी को दोहरा मापदंड बताते हुए कहा कि भाजपा खुद ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगवाती है और विपक्ष को नारे लगाने पर सीख देती है। उन्होंने पूछा कि नेहरू, इंदिरा गांधी या लाल बहादुर शास्त्री के समय क्या सदन में इस तरह की नारेबाज़ी होती थी?
सत्र के पहले ही दिन सत्ता और विपक्ष के बीच इस तीखी बयानबाज़ी ने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में संसद का माहौल बेहद गर्म रहने वाला है।

