नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (अशोक “अश्क”) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बिहार विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत समस्तीपुर जिले के कर्पूरीग्राम से की। इस दौरान उन्होंने समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित की और जनसभा को संबोधित करते हुए एनडीए के लिए जीत का बिगुल फूंका। हालांकि पीएम मोदी ने मंच से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एनडीए का स्पष्ट सीएम चेहरा घोषित नहीं किया, लेकिन “नीतीश बाबू के नेतृत्व में चुनाव” लड़ने की बात कहकर संकेत साफ कर दिए।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में बिहार में ‘जंगलराज’ की वापसी का खतरा बताते हुए आरजेडी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “आपका यह उत्साह बता रहा है कि इस बार बिहार में नीतीश बाबू के नेतृत्व में एनडीए जीत के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ देगा।” प्रधानमंत्री ने महागठबंधन की आलोचना करते हुए दावा किया कि जनता विकास और स्थिरता के लिए एनडीए के साथ है।
उधर, महागठबंधन ने गुरुवार (23 अक्टूबर) को तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया था। इसके बाद से ही एनडीए के सीएम चेहरे को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी। वहीं, आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि “बीजेपी नीतीश कुमार को एकनाथ शिंदे बनाना चाहती है। उनकी राजनीति अब अंतिम पड़ाव पर है।”
जवाब में जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा, “यह पहले से तय है कि चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। जनता का नारा फिर से होगा ‘25 से 30, फिर से नीतीश’।”
बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने भी स्पष्ट किया कि “एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगा और मुख्यमंत्री वही बनेंगे।” उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा, “जब प्रधानमंत्री ने मंच से कह दिया है कि नीतीश बाबू के नेतृत्व में चुनाव होगा, तो इसका अर्थ क्या है? विपक्ष को दूसरों के मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई हक नहीं।”
समस्तीपुर की इस रैली के साथ बिहार में चुनावी जंग आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है, जहां एनडीए विकास के एजेंडे पर और महागठबंधन बदलाव के नारे पर जनता के बीच पहुंच रहा है।

