पूर्णिया, 26 सितंबर (राजेश कुमार झा)15 सितंबर को पूर्णिया में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूरे सीमांचल एवं कोसी में अब तक की सबसे बड़ी जनसभा को लोगों ने देखा.ये जनसभा वैसे समय में की गई जब की बिहार में विधानसभा की चुनावों की लगभग तैयारियां पूरी हो चुकी है.जाहिर सी बात है कि इसका पूरा फायदा एनडीए गठबंधन उठाना जरूर चाहेगा.लेकिन अगर आंकड़ों की बातें करें तो वर्ष 2020 के विधानसभा चुनावों में सीमांचल की 24 सीटों में एनडीए गठबंधन को महज 9 सीटों में ही संतोष करना पड़ा था.

महागठबंधन को 10 सीटें मिली थी.बाकी 5 सीटें AIMIM के खातों में गई थी.लेकिन इस बार के चुनावी माहौल में पूर्णिया सीमांचल में दो बड़े नेताओं ने अपनी जोर आजमाइश की.महागठबंधन से राहुल एवं तेजस्वी की वोटर अधिकार यात्रा तो दूसरी प्रधानमंत्री की विशाल जनसभा.इसके बाद सीमांचल में वोटों की राजनीति शुरू हो गई.सभी दल अपने अपने आंकड़े लगाने एवं जुटाने में लग गए है.लेकिन इस बार प्रधानमंत्री की जनसभा के बाद एनडीए गठबंधन सीमांचल में 2020 के विधानसभा चुनावों के रिकॉर्ड को हर हाल में तोड़ना चाहेगी.लेकिन ये इतना आसान नहीं दिख रहा है.बताते चलें कि सीमांचल की 24 विधानसभा सीटों की बात करें तो सीमांचल में 12 विधानसभा सीटें ऐसी है.जहां की हार जीत का फैसला मुस्लिम वोटरों के हाथों में है.ऐसे में भाजपा जेडीयू सहित सभी एनडीए के घटक दल इन 12 सीटों पर सेंध लगाने की जरूर कोशिश करेगी.लेकिन दूसरी तरफ महागठबंधन भी पिछले विधानसभा के रिकॉर्ड को जरूर तोड़ने में अपनी रणनीति बनाएगी.महागठबंधन कभी भी नहीं चाहेगी कि इन विधानसभा सीटों में एनडीए की सेंध लगे.

