नई दिल्ली, 07 नवम्बर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर दिए गए आदेश ने कई पशुप्रेमियों को निराश किया है। सुप्रीम कोर्ट की वकील और याचिकाकर्ता ननिता शर्मा ने कहा कि वे अदालत के आदेश का सम्मान करती हैं, लेकिन यह फैसला अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोच्च है, इसलिए हम उसका पालन करेंगे, परंतु आज का दिन बहुत दर्दनाक है।”

ननिता शर्मा की आंखों में भावनाएं झलकती दिखीं जब उन्होंने बताया कि अब सरकारी दफ्तरों, शैक्षणिक संस्थानों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टॉप से कुत्तों को हटाकर अन्य स्थानों पर री-लोकेट किया जाएगा। इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो सुनिश्चित करेगा कि कुत्ते दोबारा उन स्थानों पर न लौटें।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने लगभग वही आदेश दोहराया है जो 11 अगस्त को जारी किया गया था। ननिता ने कहा, “इतना कठोर आदेश आने के बावजूद मैं अब भी ईश्वरीय न्याय में विश्वास रखती हूं। इन बेजुबान जानवरों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्हें नहीं पता कि उनके साथ क्या होने जा रहा है।”
ननिता शर्मा ने बताया कि ABC (Animal Birth Control) नियमों के तहत कुत्तों को उनके क्षेत्र से हटाना प्रतिबंधित है, परंतु अब काटने की घटनाओं के आधार पर यह कदम सही ठहराया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल कुत्तों ही नहीं, बल्कि गाय और अन्य जानवरों को भी प्रभावित करेगा।
इस फैसले पर सांसद मेनका गांधी ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “यह जजमेंट जस्टिस पारदीवाला के आदेश से भी खराब है। इतने कुत्तों को हटाने के लिए पचास शेल्टर चाहिए, लेकिन जगह कहां है?”

