नई दिल्ली, 25 सितम्बर (अशोक “अश्क”) सुप्रीम कोर्ट ने फिरोजाबाद जिले के एक स्कूल में 100 वर्षों से चल रही रामलीला के आयोजन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक के आदेश को अस्थायी रूप से रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि रामलीला का आयोजन जारी रह सकता है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालय के किसी भी छात्र को इससे कोई असुविधा न हो।

मामले की सुनवाई श्रीनगर रामलीला महोत्सव समिति द्वारा दायर याचिका पर की गई, जिसमें हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें धार्मिक आयोजन को विद्यालय के मैदान में करने पर आपत्ति जताई गई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि वह स्कूल में धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं देता, हालांकि यह भी माना था कि रामलीला आयोजन पिछले 100 वर्षों से होता आ रहा है और इस वर्ष भी 14 सितंबर से शुरू हो चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई में श्रीनगर रामलीला महोत्सव के आयोजन को लेकर अन्य पक्षों की भी राय ले और भविष्य के लिए किसी वैकल्पिक स्थल का प्रस्ताव पेश करे।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता प्रदीप सिंह राणा की खिंचाई भी की और पूछा कि जब यह आयोजन 14 सितंबर से शुरू हो गया था, तब इतनी देरी से याचिका क्यों दायर की गई। पीठ ने कहा, “आपने खुद माना कि यह रामलीला 100 वर्षों से चली आ रही है। फिर आपने पहले कोर्ट का रुख क्यों नहीं किया? न आप छात्र हैं और न ही छात्र के अभिभावक, तो फिर इस महोत्सव को रोकने में आपकी रुचि क्यों है?”
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को रामलीला आयोजन समिति के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि छात्रों की पढ़ाई और स्कूल की दिनचर्या प्रभावित नहीं होनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट में निर्धारित तिथि पर होगी।

