नई दिल्ली, 28 नवम्बर (अशोक “अश्क”) राजस्थान के गैरकानूनी धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2025 के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह आदेश दिया।पीपुल्स यूनियन फॉर लिबर्टीज और अन्य याचिकाकर्ताओं ने अधिनियम के प्रावधानों को ‘मनमाने, अनुचित और संविधान के खिलाफ’ करार देने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह कानून अनुच्छेद 14 और 21 समेत अन्य संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है।सीनियर एडवोकेट संजय पारिख ने याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में दलील दी, जबकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इसी तरह की कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित हैं और इस याचिका को उनमें जोड़ दिया जाना चाहिए।सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को पहले से लंबित समान मुद्दे की याचिकाओं के साथ जोड़ते हुए राजस्थान सरकार से जवाब तलब किया। अदालत पहले ही राजस्थान में लागू धर्मांतरण रोधी कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।सप्रीम कोर्ट ने सितंबर में कई राज्यों—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक—में लागू धर्मांतरण रोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की जांच शुरू की थी। अदालत ने कहा था कि सभी जवाब दाखिल होने के बाद ही कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगाने पर निर्णय लिया जाएगा।

