पटना, 08 दिसंबर (पटना डेस्क) बिहार में अपराधियों की अब खैर नहीं! नई सरकार के गठन के साथ ही गृह विभाग भारतीय जनता पार्टी के पास आते ही कानून-व्यवस्था पर सबसे कड़ा वार किया गया है। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में 100 फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का ऐतिहासिक ऐलान कर दिया है, जिससे अब मामले सालों तक नहीं, बल्कि महीनों में निपटाए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे न्याय देरी नहीं, समय पर मिलेगा और अपराधियों की ‘दौड़-भाग’ हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

सम्राट चौधरी ने बताया कि इस समय बिहार की अदालतों में 18 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जिससे न सिर्फ जनता परेशान है बल्कि न्याय व्यवस्था भी चरमराई हुई है। नए फैसले से गंभीर मामलों की सुनवाई तेज होगी और आम अदालतों का बोझ कम होगा।फास्ट-ट्रैक अदालतों को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेंच क्लर्क, स्टेनोग्राफर, डिपोजिशन राइटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, चालक, प्रोसेस सर्वर और चपरासी समेत लगभग 900 पदों पर भर्ती की जाएगी। इससे न्याय प्रणाली तो मजबूत होगी ही, साथ ही बेरोजगार युवाओं के लिए नए अवसर भी खुलेंगे।गृह मंत्री ने घोषणा की कि अवैध हथियार, फायरिंग, तस्करी और गैंगवार जैसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए 79 अदालतें विशेष अधिनियम अदालत के रूप में नामित होंगी। सरकार का मानना है कि इससे अपराधियों में कानून का खौफ स्पष्ट दिखेगा।पटना में 8, गया–मुजफ्फरपुर–दरभंगा–भागलपुर में 4-4, नालंदा, रोहतास, सारण, मधुबनी समेत कई जिलों में 3 अदालतें और अधिकांश जिलों में 2-2 फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित की जाएंगी। नौगछिया और बगहा में एक-एक कोर्ट का भी प्रस्ताव है।भू-माफिया, बालू माफिया और शराब माफिया को सख्त चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा—“बिहार अपराधियों के लिए नहीं है। सुधरना होगा या राज्य छोड़ना होगा।”गृह मंत्री ने पुलिस-प्रशासन को साफ निर्देश दिया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

