
नई दिल्ली, 17 फरवरी (अशोक “अश्क”) देश की कर व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में अटका है। आयकर विभाग के मुताबिक 16.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पुनर्मूल्यांकन (री-असेसमेंट) कार्यवाही लंबित पड़ी है।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि Union of India v. Ashish Agarwal फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में करीब 2000 और देशभर के हाई कोर्ट में लगभग 18,000 मामले लंबित हैं।केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि आयकर अधिनियम 1961 की धारा 150 में संशोधन की प्रक्रिया जारी है और संशोधित प्रावधान 1 अप्रैल से लागू हो सकते हैं। सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि संशोधन लागू होते ही सभी नोटिस और आकलन कार्यवाहियां फिर से जीवित हो जाएंगी और समयसीमा तय कर आदेश पारित किए जा सकेंगे।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने संकेत दिया कि यदि संशोधन की वैधता को चुनौती दी जाती है तो अदालत तीन महीने का ‘मोराटोरियम’ देने पर विचार कर सकती है, ताकि पक्षकार नए कानून को चुनौती दे सकें। न्यायमूर्ति जे. नागरत्ना ने भी कहा कि संसद के संशोधन का प्रभाव और उसका पूर्व फैसलों पर असर अदालत को परखना होगा।याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे पहले ही पांच साल गंवा चुके हैं और फेसलेस री-असेसमेंट की वैधता स्पष्ट होनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी। अब निगाहें 1 अप्रैल से लागू होने वाले संशोधन पर टिकी हैं, जो लंबित हजारों मामलों की दिशा तय करेगा।

