
बक्सर, 04 जनवरी (विक्रांत) प्रताप सागर स्थित मेथोडिस्ट अस्पताल बक्सर जिले में प्रधानमंत्री यक्ष्मा मुक्त भारत अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। 166 वर्षों से संचालित यह अस्पताल उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, बिहार के रोहतास, कैमूर, भोजपुर, बक्सर सहित पश्चिम बंगाल तक के यक्ष्मा रोगियों के इलाज का बड़ा केंद्र है। यहां फेफड़े, आंख जांच, सर्पदंश उपचार व आपातकालीन सेवाएं अत्याधुनिक उपकरणों से उपलब्ध हैं।

अस्पताल की स्थापना के लिए डुमरांव महाराजा सह पूर्व सांसद स्वर्गीय कमल सिंह ने करीब 25 एकड़ जमीन दान की। उस दौर में टीबी असाध्य व छुआछूत से जोड़ा जाता था। मिशनरी चिकित्सकों डा. लायंग्र, डा. हॉफरमैन, डा. सीएम जोशी व डा. एसके सिंह के सहयोग से 1958 में अस्पताल भवन तैयार हुआ और इलाज शुरू हुआ।डा. एस. सिंह के कार्यकाल में सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ, सर्पदंश दवा, वार्ड व आपात व्यवस्था बनी। कोरोना काल में जब निजी अस्पताल बंद थे, तब यहां चार हजार से अधिक मरीजों को ऑक्सीजन देकर जीवनदान मिला।

हाल ही में उत्कृष्ट योगदान पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अधीक्षक डा. आरके सिंह को सम्मानित किया।अस्पताल आज भी गरीब, असहाय व दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले रोगियों के लिए आशा की किरण बना हुआ है। यक्ष्मा उन्मूलन के लक्ष्य को साकार करने में मेथोडिस्ट अस्पताल का योगदान बक्सर ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए मिसाल माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे जनसेवा, समर्पण और सतत संघर्ष का जीवंत उदाहरण बता रहे हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। देश के लिए गौरव है।

