पटना, 16 नवम्बर (पटना डेस्क) 2025 के विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक विधायक राजपूत जाति से चुने गए हैं। इस बार राजपूत विधायकों की संख्या 32 रही, जिसमें महागठबंधन और एनडीए के दलों के प्रत्याशी शामिल हैं। इसके बाद यादव समुदाय के विधायकों की संख्या पिछले चुनाव की तुलना में आधी रह गई। 2020 में यादवों के 55 विधायक थे, जो इस बार घटकर 28 रह गए, जिनमें से 15 एनडीए से हैं।

इस चुनाव में कुर्मी समुदाय से 25, कुशवाहा से 23, वैश्य से 26, भूमिहार से 23, ब्राह्मण से 14, कायस्थ से 3 और पिछड़ा वर्ग से 13 विधायक चुने गए। वहीं, दलित समुदाय के 36, एसटी के 11 और मुस्लिम समुदाय के केवल 10 विधायक विधानसभा पहुंचे।
पिछले चुनाव, 2020 में यादवों के 55 विधायक थे, कुर्मी 10, कुशवाहा 16, राजपूत 18, भूमिहार 17, वैश्य 22 और ब्राह्मण 12 विधायक बने थे। दलित समुदाय के 38, एसटी के 2 और मुस्लिम समुदाय से 14 विधायक चुने गए थे।
इस आंकड़े से स्पष्ट है कि 2025 के चुनाव में जातिगत समीकरणों में बदलाव आया है। खासकर यादवों का प्रभुत्व कमजोर हुआ है, जबकि राजपूत और दलित विधायकों की संख्या बढ़ी है। मुस्लिम सियासत में भी बदलाव देखा गया, जिसमें ओवैसी नया चेहरा बने हैं।

