
औरंगाबाद, 27 दिसम्बर (औरंगाबाद डेस्क) बिहार के औरंगाबाद जिले के भोपतपुर के रामप्रवेश महतो 24 साल बाद जिंदा लौट आए, जिन्हें परिवार ने सालों पहले मृत मानकर प्रतीक दाह संस्कार कर दिया था। यह घटना पूरे परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। पिता की जीवित होने की खबर मिलने के बाद परिवार उन्हें घर लाने के लिए औरंगाबाद से लगभग 1400 किलोमीटर दूर पंजाब के जालंधर रवाना हो गया।रामप्रवेश महतो 2001 में प्रयागराज कुंभ मेले के लिए घर से निकले थे, लेकिन तब से लापता थे। परिवार ने खोजबीन और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन सफलता नहीं मिली।

2009 में उनकी पत्नी जसवा देवी का निधन हो गया, तब परिवार ने बुजुर्गों की सलाह पर उनके पुत्र संतोष कुशवाहा द्वारा प्रतीक दाह संस्कार किया।कुछ दिन पहले, जालंधर के एक वृद्धाश्रम में उन्हें ट्रक चालक और महंत जिंदर मानसिंह के माध्यम से पहचाना गया। गूगल और स्थानीय संपर्कों की मदद से संतोष कुशवाहा से संपर्क स्थापित हुआ। 23 दिसंबर को पता चला कि वृद्धाश्रम में रहने वाला वही उनके पिता हैं।शुक्रवार की शाम संतोष और उनके साथी जालंधर पहुंचे और 24 साल बाद पुनर्मिलन किया।

संतोष ने बताया कि यह उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। आवश्यक औपचारिकताओं के बाद पिता को घर लौटाया गया, जहाँ पूरे परिवार ने उनके स्वागत की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं और घर में खुशी का माहौल लौट आया है।

