
नई दिल्ली, 17 फरवरी (अशोक “अश्क”) भारत अपनी वायु शक्ति को ऐतिहासिक मजबूती देने जा रहा है। सरकार 114 अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में है, जिन पर करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसे देश की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य डील माना जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के भारत दौरे के दौरान इस समझौते पर मुहर लगने की संभावना है।

डील के तहत 96 विमान भारत के नागपुर स्थित डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) में तैयार होंगे, जबकि 18 विमान फ्रांस में बनेंगे। सभी जेट 2030 तक भारतीय वायुसेना को मिलेंगे। इससे पहले 2016 में भारत 36 राफेल खरीद चुका है, जबकि नेवी के लिए 26 राफेल का अधिग्रहण किया गया है।कीमत को लेकर तुलना भी शुरू हो गई है। इंडोनेशिया ने 42 राफेल करीब 68 हजार करोड़ रुपये में खरीदे थे, जबकि भारत का प्रति विमान खर्च अधिक दिख रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत सिर्फ विमान नहीं, बल्कि मेटियोर और स्कैल्प मिसाइल, हैमर प्रिसीजन बम, फुल मिशन सिम्युलेटर, लंबी अवधि के मेंटेनेंस पैकेज, स्पेयर पार्ट्स और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी खरीद रहा है। यह पूरी लाइफ साइकिल कॉस्ट है।भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 की है। 2035 तक राफेल की कुल संख्या 176 होने से वायु शक्ति को निर्णायक बढ़त मिलने की उम्मीद है।

