हैदराबाद (अंकिता राय) भगवान गणेश के प्रति 50 वर्षों की निष्ठावान भक्ति और समर्पण का एक अनूठा उदाहरण हैं सिकंदराबाद के मर्रेडपल्ली निवासी पाबसेट्टी शेखर, उन्होंने गणेश से जुड़ी स्मृतियों और प्रतीकों का ऐसा विशाल संग्रह तैयार किया है, जो न केवल भारत, बल्कि विश्व स्तर पर भी सराहा जा रहा है।

अब तक शेखर ने 58,748 गणेश स्मृति चिन्ह एकत्र किए हैं, जिनमें 21,708 मूर्तियां, 19,558 पोस्टकार्ड, 14,950 तस्वीरें, 11,005 पोस्टर, 250 की-चेन और सैकड़ों ऑडियो-वीडियो कैसेट शामिल हैं। यह संग्रह 1973 में तब शुरू हुआ जब उन्होंने शिरडी यात्रा के दौरान 50 पैसे की एक गणेश प्रतिमा खरीदी। तभी से गणेश भक्ति उनका जीवन बन गई।
शेखर का यह समर्पण उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (2014-15) में स्थान दिला चुका है। इसके अलावा उन्होंने 15 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं, जिनमें लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं भी शामिल हैं।
गणेश भक्ति के इस संग्रह को उन्होंने विश्व के 38 देशों से जुटाया है, जिनमें जापान, थाईलैंड, इंडोनेशिया और कंबोडिया जैसे देश प्रमुख हैं। उनकी सबसे महंगी प्रतिमा थाईलैंड से 1 लाख रुपये में खरीदी गई थी।
संग्रह के साथ-साथ शेखर ने गणेश मंदिरों पर 25 वर्षों का शोध भी किया है, जिसका फल है उनका 2,000 पन्नों का ग्रंथ ‘विश्व विनायक’, जिसे वे समाजसेवा और चैरिटी के लिए प्रकाशित करना चाहते हैं।
इधर हैदराबाद में गणेश चतुर्थी की तैयारियां जोरों पर हैं। बाजारों में कोलकाता और महाराष्ट्र से लाई गई *PoP की मूर्तियों की भरमार है। लेकिन झीलों में इनका विसर्जन पर्यावरणीय संकट का कारण बन रहा है। ऐसे में विशेषज्ञ मिट्टी की प्रतिमाएं अपनाने की अपील कर रहे हैं, ताकि परंपरा और प्रकृति दोनों का संतुलन बना रहे।
शेखर जैसे भक्त यह दर्शाते हैं कि आस्था यदि समर्पण और सेवा से जुड़ जाए, तो वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है।

