
नई दिल्ली, 17 फरवरी (अशोक “अश्क”) देश की सबसे चर्चित इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल 90,000 करोड़ रुपये से अधिक के ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट को बड़ा कानूनी राहत मिली है। National Green Tribunal (NGT) ने सोमवार को इस परियोजना को मंजूरी देते हुए इसके खिलाफ दायर सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने 2022 में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा दी गई स्वीकृति को बरकरार रखा।

NGT ने अपने आदेश में कहा कि परियोजना की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए पर्याप्त सेफगार्ड्स अपनाए गए हैं और हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं बनता। साथ ही सरकार को शर्तों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है।यह मेगा प्रोजेक्ट ग्रेट निकोबार द्वीप के गलाथिया खाड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित है। यहां सिविल-मिलिट्री दोहरे इस्तेमाल वाला एयरपोर्ट, ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और 166 वर्ग किलोमीटर में फैला एकीकृत शहर विकसित किया जाएगा।

यह इलाका मलक्का जलडमरूमध्य से महज 160 किलोमीटर दूर है, जहां से दुनिया के 40 फीसदी तेल टैंकर गुजरते हैं।द्वीप पर निकोबार मेगापोड, लेदर बैक कछुआ और निकोबारी लंगूर जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं, साथ ही शोंपेन और निकोबारी जनजातियों का भी यह घर है। रणनीतिक रूप से यह परियोजना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत करेगी और 2012 में स्थापित INS Baaz की क्षमताओं को भी बढ़ावा देगी।

