
बक्सर, 06 जनवरी (विक्रांत) आजादी के बाद लोकसभा के प्रथम सांसद और डुमरांव के पूर्व महाराजा कमल सिंह सादगी, सेवा और नैतिक राजनीति की ऐसी मिसाल थे, जिन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंदी से लेकर आम नागरिक आज भी आदर से याद करते हैं। सत्ता में न रहते हुए भी क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए उनका दरवाजा हमेशा खुला रहता था। डुमरांव रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव से लेकर जर्जर सड़कों और सिंचाई की नहरों तक, लोग बेझिझक पुराना भोजपुर स्थित डुमरांव कोठी पहुंच जाते थे।

बुढ़ापे और शारीरिक कमजोरी के बावजूद वे क्षेत्र के विकास को लेकर चिंतन करते रहे। अक्सर कहते थे—“अब मैं थक गया हूं”, लेकिन पत्राचार और पत्रकार सम्मेलनों के जरिए केंद्र व राज्य सरकार तक जनसमस्याएं पहुंचाते रहे। वरिष्ठ पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की मौजूदगी में वे खुद को “फ्यूज बल्ब” कह देते थे, जिसे सुनकर लोग भावुक हो उठते थे।पूर्व महाराजा के व्यक्तिगत संबंध पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी से रहे, जबकि राजमाता सिंधिया परिवार से उनका निकट रिश्ता था।

भाजपा और जनसंघ के करीब रहने के बावजूद उनकी सोच किसी विचारधारा की सीमाओं में बंधी नहीं थी। यही कारण था कि राजनीतिक मतभेद के बावजूद उन्होंने सीपीआई नेता नागेंद्र नाथ ओझा को विकास कार्यों के लिए सम्मानित किया।कमल सिंह ने 1952 और 1962 में सांसद के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 29 सितंबर 1926 को जन्मे कमल सिंह ने शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजसेवा में अमिट योगदान दिया। राज हाई स्कूल, उषा रानी बालिका उच्च विद्यालय, डुमरांव राज अस्पताल, मेथोडिस्ट टीबी अस्पताल और आरा के महाराजा कॉलेज के लिए भूमि दान उनके योगदान के जीवंत उदाहरण हैं। 05 जनवरी 2020 को उनका निधन हो गया, लेकिन सादगी और सेवा की उनकी विरासत आज भी जीवित है।

