
पटना, 17 जनवरी (पटना डेस्क) मकर संक्रांति के साथ ही बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। दही-चूड़ा भोज अब सिर्फ पर्व का हिस्सा नहीं, बल्कि सियासी संकेत बनता दिख रहा है। शुक्रवार को इसकी बानगी तब दिखी जब उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के विधायक भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दही-चूड़ा भोज में शामिल नजर आए।

खास बात यह रही कि यही विधायक हाल ही में कुशवाहा की लिट्टी-चोखा पार्टी से नदारद थे।14 और 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई गई, लेकिन सियासी दावतें 12 जनवरी से ही शुरू हो गई थीं, जो 16 जनवरी तक चलीं। शुक्रवार को नितिन नबीन के पटना स्थित आवास पर आयोजित भोज से जो तस्वीर सामने आई, उसने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। आरएलएम के विधायक रामेश्वर महतो, माधव आनंद और आलोक सिंह वहां मौजूद दिखे। रामेश्वर महतो ने सोशल मीडिया पर फोटो साझा कर लिखा कि उन्हें इस भव्य भोज में शामिल होने का सौभाग्य मिला।

इस पोस्ट के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। दरअसल, आरएलएम के चार में से तीन विधायक अपने सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा से नाराज बताए जा रहे हैं। आरोप है कि कुशवाहा ने परिवारवाद को बढ़ावा देते हुए अपने बेटे दीपक प्रियदर्शी को आगे बढ़ाया। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या ये विधायक अलग गुट बनाकर बिहार की राजनीति की तस्वीर बदल देंगे।

