
नई दिल्ली, 21 जनवरी (अशोक “अश्क”) वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण से जुड़े ‘उम्मीद पोर्टल’ को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा संदेश दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने वक्फ बोर्ड से जुड़े एक मुतवल्ली की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला किसी तकनीकी खामी का नहीं, बल्कि कानून द्वारा तय किए गए वर्गीकरण से जुड़ा है। हालांकि, याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकरण से संपर्क करने की छूट दी गई, लेकिन पोर्टल में तकनीकी समस्या होने की दलील को पूरी तरह नकार दिया गया।

इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। याचिका मध्य प्रदेश के एक मुतवल्ली की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘उम्मीद पोर्टल’ पर वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण करते समय तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि पोर्टल के ड्रॉपडाउन मेन्यू में ‘वक्फ बाय सर्वे’ और ‘वक्फ बाय यूजर’ को अलग-अलग विकल्प के रूप में नहीं दिखाया गया है, जिससे डेटा अपलोड संभव नहीं हो पा रहा।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कोई तकनीकी समस्या होती, तो उसका समाधान प्रशासनिक या सॉफ्टवेयर स्तर पर किया जाना चाहिए था। सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि नए कानून के तहत ‘वक्फ बाय सर्वे’ और ‘वक्फ बाय यूजर’ को अलग श्रेणियों में मान्यता नहीं दी गई है, बल्कि दोनों को एक ही वर्ग में रखा गया है।

अदालत ने यह भी साफ किया कि अब किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने के लिए ठोस दस्तावेज, दानकर्ता की जानकारी और वैध प्रक्रिया का प्रमाण अनिवार्य होगा। साथ ही, सरकारी जमीन पर बने किसी भी ढांचे को वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ेगी और लंबे समय से चले आ रहे विवादों पर लगाम लगेगी।

