
पटना, 30 जनवरी (अविनाश कुमार) कैथी लिपि में लिखे पुराने भूमि अभिलेख और दस्तावेज अब आम लोगों के लिए परेशानी का कारण नहीं बनेंगे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कैथी लिपि के दस्तावेजों के अनुवाद को सरल और सुलभ बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने 29 प्रशिक्षित कैथी लिपि परामर्शदाताओं को सूचीबद्ध कर उनकी सेवाएं राज्य के सभी जिलों में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि वर्षों से नागरिकों को पुराने भूमि दस्तावेजों के अनुवाद में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञ परामर्शदाताओं की व्यवस्था की है, ताकि अब किसी भी नागरिक को भटकना न पड़े। यह पहल राजस्व मामलों के निष्पादन को आसान, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएगी।विभागीय सचिव जय सिंह ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा और उपमुख्यमंत्री के भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि जिलों में कैथी लिपि के जानकारों की भारी कमी है।

इससे लोगों को पुराने दस्तावेजों के अनुवाद में गंभीर परेशानी हो रही थी।पत्र में उल्लेख है कि विभागीय दक्षता परीक्षा में सफल 29 परामर्शदाताओं को पांच दिवसीय विशेष आवासीय प्रशिक्षण दिया गया है। ये परामर्शदाता विभागीय कार्यों के साथ-साथ आवश्यकता अनुसार जिलों और आम नागरिकों को भी सेवाएं देंगे।अनुवाद शुल्क को लेकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि कैथी से देवनागरी लिपि में अनुवाद के लिए प्रति पृष्ठ 220 रुपये की दर तय की गई है। भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से होगा, नकद भुगतान मान्य नहीं होगा। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी और आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी।

