
नई दिल्ली, 04 फरवरी (अशोक “अश्क”) पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दलीलें रखने के लिए अदालत में पेश हुईं। कोर्ट रूम नंबर एक में मौजूद ममता ने सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला और कहा कि उन्हें कहीं से भी न्याय नहीं मिल रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ उन्होंने चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। मैं अपनी पार्टी और जनता के लिए लड़ रही हूं।” ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले जानबूझकर सिर्फ पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है।ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि राज्य में 32 लाख अनमैप्ड वोटर हैं, जबकि 1.36 करोड़ नाम लॉजिकल गड़बड़ी वाली सूची में डाले गए हैं। इसके अलावा 63 लाख मामलों में सुनवाई अभी लंबित है। उन्होंने कहा कि सुधार के लिए बहुत कम समय छोड़ा गया है।वकील ने नामों में हुई गड़बड़ियों के उदाहरण भी पेश किए।

चिराग टिबरेवाल के मामले में पिता के नाम में ‘कुमार’ जुड़ने से मिसमैच हुआ, वहीं अजीमुद्दीन खान के मामले में बंगाली से अंग्रेजी ट्रांसलेशन के दौरान गलती सामने आई। ममता ने कहा कि कई असली वोटरों के नाम बिना ठोस वजह के हटाए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि शादी के बाद ससुराल जाने वाली बेटियों, मकान बदलने वाले गरीबों और शिफ्ट हुए लोगों के नाम भी सूची से हटाए गए। उन्होंने इसे “गलत मैपिंग” करार दिया और सवाल उठाया कि अगर प्रक्रिया सही है तो असम को क्यों नहीं शामिल किया गया।सुनवाई के दौरान बीएलओ की आत्महत्या का मुद्दा भी उठा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और जवाब तलब किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

