नई दिल्ली (अशोक “अश्क”) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान के 130वें संशोधन पर जारी विपक्ष के विरोध को लेकर सोमवार को तीखा हमला बोला। एक साक्षात्कार में शाह ने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य राजनीति को शुचिता और जवाबदेही की ओर ले जाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव में यह व्यवस्था की गई है कि यदि कोई जनप्रतिनिधि गंभीर आरोपों में 30 दिन से अधिक जेल में रहता है, तो स्वत: उसका इस्तीफा मान लिया जाएगा।

इस प्रावधान पर विपक्ष की आपत्तियों का जवाब देते हुए अमित शाह ने अपना उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब उन पर सीबीआई ने एक राजनीतिक रूप से प्रेरित केस दर्ज किया था, तब उन्होंने स्वेच्छा से मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। शाह ने कहा, “जब मुझे बेल मिली, तब मैंने सभी शर्तों को स्वीकार किया और पूरी तरह निर्दोष साबित होने के बाद ही कोई पद स्वीकार किया।”
शाह ने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आफताब आलम** का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस आलम की अगुवाई वाली पीठ ने उनकी बेल याचिका पर पूरे दो साल तक सुनवाई की, जो भारतीय न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक अभूतपूर्व मामला है।
अमित शाह ने आरोप लगाया कि “आफताब आलम की कृपा” से उनकी बेल पर हर रविवार विशेष अदालत बैठाई गई, और एक ऐसी व्यवस्था बनाई गई जो पूरी तरह असाधारण थी। उन्होंने बताया कि जब कोर्ट ने आशंका जताई कि वह गुजरात में रहकर साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं, तब उनके वकील ने कहा कि शाह गुजरात से बाहर रहने को तैयार हैं, और उन्होंने वास्तव में दो साल तक गुजरात से बाहर रहकर अपनी बेगुनाही की लड़ाई लड़ी।
यह मामला शेख सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ कांड से जुड़ा था, जिसमें शाह पर आरोप लगाया गया था कि मुठभेड़ उनके आदेश पर कराई गई थी। उस समय यूपीए सरकार ने सीबीआई को जांच सौंपी थी, जिसके चलते शाह को गुजरात के गृह मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
हालांकि, तीन सप्ताह बाद उन्हें हाई कोर्ट से बेल मिल गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत उन्हें गुजरात से बाहर रहना पड़ा। अंततः 2014 में सीबीआई ने उन्हें बरी कर दिया, और कहा कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले।
शाह ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग इस संशोधन का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पहले राजनीति में नैतिकता की आवश्यकता को समझना चाहिए। यह संशोधन लोकतंत्र की मजबूती और जनता के विश्वास को कायम रखने के लिए लाया गया है।

