हैदराबाद (अंकिता राय) हैदराबाद के चैतन्यपुरी क्षेत्र स्थित प्राचीन फानिगिरी कोसगुंडला नरसिमा स्वामी मंदिर में पुरातत्वविदों ने एक ऐतिहासिक खोज की है। खुदाई के दौरान यहां 1,600 वर्ष पुराना दुर्लभ चतुर्मुख नंदीश्वर लिंगम प्राप्त हुआ है, जो दक्षिण भारत में अब तक की सबसे अनोखी खोजों में से एक मानी जा रही है।

यह शिवलिंग ग्रेनाइट से निर्मित है और इसके चारों ओर चार दिशाओं में मुख किए हुए चार नंदी स्थापित हैं, जिनकी ऊंचाई लगभग 8 इंच है। शिवलिंग के केंद्र में अभिषेक जल की निकासी की विशेष व्यवस्था भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। इस खोज को वरिष्ठ इतिहासकार एवं शोधकर्ता डॉ. द्यवानपल्ली सत्यनारायण ने दर्ज किया है, जिन्होंने इसे गुप्तकाल (लगभग चौथी शताब्दी ईस्वी) की कृति बताया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण भारत में गुडिमल्लम जैसे प्राचीन शिवलिंग पहले भी पाए गए हैं, परंतु चारों ओर नंदियों से घिरे इस प्रकार के लिंगम की यह पहली खोज है, जो इसे विशेष रूप से दुर्लभ बनाती है।
चैतन्यपुरी क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से एक बौद्ध मठ “गोविंदराज विहार” के रूप में जाना जाता था। इस खोज से यह संकेत मिलता है कि उस समय धीरे-धीरे बौद्ध धर्म के स्थान पर शैव परंपरा का उदय हुआ। विष्णुकुंडी वंश (लगभग 400 ईस्वी) के दौरान इस धार्मिक परिवर्तन को विशेष रूप से देखा गया।
डॉ. सत्यनारायण ने राज्य सरकार और मंदिर प्राधिकरण से अनुरोध किया है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत को देख सकें और इसका अध्ययन कर सकें। यह खोज भारतीय पुरातत्व के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

