पटना (अशोक “अश्क”) बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। इसी बीच राजधानी पटना में जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश कार्यालय के बाहर लगे एक पोस्टर ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। इस पोस्टर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उनकी राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी बताया गया है।

हालांकि, निशांत कुमार अब तक राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं और उन्होंने किसी प्रकार की सक्रिय राजनीतिक भूमिका नहीं निभाई है। न ही उन्होंने और न ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब तक सार्वजनिक तौर पर इस पर कोई स्पष्ट बयान दिया है। इसके बावजूद, जेडीयू दफ्तर के बाहर लगे इस नए पोस्टर को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
पोस्टर में निशांत कुमार की तस्वीर के साथ लिखा है:
“ईमानदारी और जनसेवा की नई पीढ़ी। जनसेवा की विरासत अब आगे बढ़ेगी… विकास पुरुष का बेटा, बिहार का भविष्य – निशांत कुमार। जननायक कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा और नीतीश कुमार जी की कार्यशैली के वारिस – निशांत कुमार।”
इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल साफ तौर पर यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक शैली और विचारधारा को अब उनका बेटा आगे बढ़ाएगा।
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब निशांत कुमार को लेकर ऐसे राजनीतिक पोस्टर पटना में दिखाई दिए हैं। इससे पहले भी बिहार की राजनीति में निशांत कुमार को सक्रिय करने की मांग** करते हुए कुछ पोस्टर लगाए जा चुके हैं। उन पोस्टरों में भी उन्हें पार्टी में अहम भूमिका देने की अपील की गई थी।
निशांत कुमार, जो पेशे से इंजीनियर हैं और अब तक सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए हुए हैं, समय-समय पर मीडिया में अपने पिता के काम की सराहना करते आए हैं। वे यह भी कहते रहे हैं कि नीतीश कुमार ने राज्य में जो काम किया है, उसके आधार पर जनता से वोट मांगे जाने चाहिए।
जेडीयू दफ्तर के बाहर अचानक इस तरह के पोस्टर का लगना कई तरह के राजनीतिक संकेत दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्टर एक सोची-समझी रणनीति के तहत लगाया गया है, ताकि जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया देखी जा सके।
हालांकि, पार्टी की ओर से इस पोस्टर के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि क्या जेडीयू नेतृत्व ने इसे अनुमोदित किया है या यह किसी उत्साही समर्थक की पहल है।
बहरहाल, इस पोस्टर ने इतना तो साफ कर दिया है कि जेडीयू के भीतर या उसके समर्थकों के बीच निशांत कुमार को लेकर **चर्चा जोर पकड़ रही है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में क्या नीतीश कुमार खुद इस विषय पर कोई रुख स्पष्ट करते हैं, या निशांत कुमार वाकई बिहार की राजनीति में कदम रखते हैं।

