
पटना, 11 फरवरी (अविनाश कुमार) बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी (बीपीसीसी) ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए अपने ही 14 पूर्व पदाधिकारियों और नेताओं के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है। प्रदेश नेतृत्व ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिन लोगों पर पहले से अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है, उन्हें किसी भी स्तर पर मंच, समर्थन या संगठनात्मक सहयोग नहीं दिया जाएगा।प्रदेश मुख्यालय से जारी आधिकारिक निर्देश में जिला और प्रखंड स्तर के अध्यक्षों को कहा गया है कि वे सूचीबद्ध नेताओं के कार्यक्रमों, बैठकों और अभियानों से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।

साथ ही कार्यकर्ताओं को भी सतर्क किया जाए कि वे ऐसे किसी आयोजन में शामिल न हों। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कहीं इन नेताओं की सक्रियता की सूचना मिलती है तो उसे तत्काल प्रदेश अनुशासन समिति को भेजा जाए।प्रदेश कांग्रेस के अनुसार, हाल के दिनों में शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग जिलों में जाकर स्वयं को अधिकृत प्रतिनिधि बताकर कार्यकर्ताओं से संपर्क कर रहे हैं और भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए अनुशासन समिति के पुराने फैसलों को दोहराया गया और साफ कर दिया गया कि संगठन का उनसे कोई लेना-देना नहीं है।

चेतावनी सूची में छत्रपति यादव, आनंद माधव, सुधीर कुमार उर्फ बंटी चौधरी, राज कुमार राजन, नागेंद्र पासवान विकल, मधुरेंद्र कुमार सिंह, प्रद्युम्न यादव, शकीलुर रहमान, उर्मिला सिंह नीलू, सुधा मिश्रा, वसी अख्तर, कैसर खान, कुंदन गुप्ता और राज कुमार शर्मा के नाम शामिल हैं।मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के समय से ही कुछ लोग संगठन विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए थे। पार्टी का दावा है कि इनकी गतिविधियों से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंच रहा था। कांग्रेस ने दो टूक कहा है कि पार्टी हितों से समझौता किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

