पटना (अशोक “अश्क”) बिहार में इन दिनों ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की गूंज हर तरफ सुनाई दे रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुआई में निकली यह यात्रा 17 अगस्त से शुरू हुई है और 1 सितंबर को पटना में समाप्त होगी। यात्रा का उद्देश्य है मतदाता अधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज़ उठाना। इसी कड़ी में जब यह काफिला लखीसराय जिले के निस्ता गांव से गुज़रा, तो गांव में मानो मेले जैसा माहौल बन गया।

बारिश से भीगी सड़क पर जहां आम दिनों में मवेशी बंधे रहते हैं, उन्हें पीछे हटा दिया गया था। जगह-जगह लोग बुज़ुर्ग, नौजवान, महिलाएं और बच्चे राहुल गांधी की झलक पाने को बेताब नज़र आए। काफिले में शामिल महंगी गाड़ियां, मीडिया ट्रक, लाइव क्रेन और राहुल गांधी से मिलने की चाहत लोगों की उत्सुकता को और बढ़ा रही थी। हालांकि सुरक्षा घेरे के कारण चंद लोग ही उनसे हाथ मिला सके।
यात्रा के दौरान बजते डीजे पर राहुल और कांग्रेस केंद्रित गाने जैसे “तुमको तनिक नहीं है चिंता जनादेश की, अब तो आएगी सरकार कांग्रेस की” लोगों के जोश में और इज़ाफा कर रहे थे। निस्ता गांव में मौजूद रवि कुमार कहते हैं, “तेजस्वी हमारे स्थायी नेता हैं, लेकिन राहुल गांधी अब बिहार में फेमस हो गए हैं। वो वोट चोरी की बात समझा रहे हैं, जो सबको समझनी चाहिए।”
गांवों में लोग राहुल गांधी को अब भी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से जोड़ते हैं। सफाई कर्मचारी पुतुल देवी कहती हैं, “राजीव का बेटा आ रहा है, इसलिए सफाई ज्यादा हो रही है। अगर हमें स्थायी नौकरी दे दें तो दुआ लगेगी।”
यह यात्रा अब तक 1300 किलोमीटर का रास्ता तय कर चुकी है और 25 जिलों से होकर गुज़रेगी। राहुल के साथ यात्रा में तेजस्वी यादव (राजद), दीपांकर भट्टाचार्य (भाकपा माले), मुकेश सहनी (वीआईपी) और कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम भी शामिल हैं। चुनाव आयोग की जारी पहली ड्राफ्ट लिस्ट में 65 लाख वोटरों के नाम नहीं होने का मुद्दा इस यात्रा का आधार बना है।
राहुल गांधी इस मंच से बार-बार कहते हैं, “हम बिहार में वोट चोरी नहीं होने देंगे।” झापानी गांव के ढाबे पर बैठे अजय शर्मा कहते हैं, “राहुल का आंदोलन देशहित में है। वोटर अधिकार सबसे बड़ा मुद्दा है, विपक्ष को इसे लेकर सड़क पर आना चाहिए।” उनके साथ बैठे जयप्रकाश जोड़ते हैं, “अगर वोट नहीं बचा, तो राजतंत्र लौट आएगा।”
एक रिपोर्ट के मुताबिक, यात्रा में कांग्रेस के झंडे सबसे ज़्यादा दिख रहे हैं। राजद, वामपंथी पार्टियों की उपस्थिति तुलनात्मक रूप से कम है। मुंगेर में तो राजद के नेता झंडा ऊंचा करने के लिए अपने कार्यकर्ताओं पर गुस्सा करते दिखे। वहीं पत्रकारों का कहना है “कांग्रेस शो स्टीलर है, पैसा उसी का है, इसलिए वही दिख रही है।”
हालांकि राजद इसका खंडन करता है। महासचिव प्रमोद यादव कहते हैं, “हम गठबंधन धर्म निभा रहे हैं, कहीं कांग्रेस के झंडे ज्यादा हैं तो कहीं हमारे। हम पूरी ताकत से साथ चल रहे हैं।”
कांग्रेस ने इस बार संगठनात्मक स्तर पर भी ज़ोर लगाया है। प्रभारी कृष्णा अल्लावरू के नेतृत्व में ‘हर घर झंडा’ जैसे अभियानों ने कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा। यात्रा से पहले नेताओं को निर्देश दिया गया कि झंडा लगाना नहीं, बल्कि जनता को मोबलाइज़ करना उनकी ज़िम्मेदारी है।
लोगों की प्रतिक्रिया भी ‘मिक्सड’ है। यात्रा में आम जनता की भागीदारी दिखती है। उर्मिला देवी कहती हैं, “राहुल गांधी गरीबों के लिए आए हैं। 2500 रुपये महिलाओं को देंगे अगर नहीं देंगे, तो हम भी घर बैठ जाएंगे और क्या करेंगे?”
गौरतलब है कि कांग्रेस ने महिलाओं के लिए ‘माई-बहिन मान योजना’ की घोषणा की है, जिसके तहत ज़रूरतमंद महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का वादा किया गया है।
बिहार में इस यात्रा ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है, और कांग्रेस ने एक बार फिर खुद को केंद्र में लाकर विपक्ष की धुरी बनने की कोशिश शुरू कर दी है।

