
पटना, 08 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होती दिख रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। 6 फरवरी को इसकी औपचारिक घोषणा के बाद अब पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय झा ने साफ कर दिया है कि निशांत को किसी औपचारिक सदस्यता की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे पहले से ही पार्टी की विचारधारा से जुड़े रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार निशांत कुमार के लिए युवा नेताओं की एक खास टीम तैयार की जा रही है, जो राजनीतिक गतिविधियों में उनका सहयोग करेगी। माना जा रहा है कि यह टीम संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में चल रहे हालिया सियासी घटनाक्रम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि नीतीश कुमार जल्द ही राज्यसभा जा सकते हैं, लेकिन वे दिल्ली में स्थायी रूप से नहीं रहेंगे।

वे बिहार में रहकर पार्टी और संगठन पर अपनी पकड़ बनाए रखेंगे।इसी कड़ी में यह भी चर्चा है कि निशांत की एंट्री के लिए पहले से “सेफ जोन” तैयार किया जा रहा है, ताकि उन्हें धीरे-धीरे संगठन की कमान सौंपी जा सके। सियासी जानकारों का कहना है कि अगर नीतीश कुमार सीधे अपने बेटे को आगे बढ़ाते तो उन पर परिवारवाद के आरोप लग सकते थे, जैसा आरोप अक्सर लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर लगता रहा है।अब जब निशांत कुमार की एंट्री कार्यकर्ताओं की मांग के रूप में सामने आ रही है, तो इसे भावनात्मक और राजनीतिक समर्थन दोनों मिल सकता है। हालांकि इस घटनाक्रम के बाद एक सवाल फिर तेज हो गया है—क्या बिहार की राजनीति में वंशवाद की पकड़ और मजबूत होने जा रही है?

