
मुजफ्फरपुर, 10 मार्च (संतोष गुप्ता) अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने वाली पुलिस के कई अधिकारी अब खुद कानून के शिकंजे में फंसते नजर आ रहे हैं। मुजफ्फरपुर की विशेष एनडीपीएस कोर्ट संख्या-2 ने पुलिस की गंभीर लापरवाही पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए डीएसपी, थानाध्यक्ष और जांच अधिकारियों समेत कुल 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। यह मामला NDPS Act के तहत दर्ज दो अलग-अलग मामलों से जुड़ा है, जिनमें स्मैक और हशीश की बरामदगी शामिल है।

कोर्ट ने पाया कि इन मामलों में नामित पुलिस अधिकारी वर्षों से कोर्ट में गवाही देने से बचते रहे, जिसके कारण ट्रायल प्रक्रिया लगातार प्रभावित होती रही।विशेष एनडीपीएस जज नरेंद्र पाल सिंह ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों की लापरवाही से न केवल न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो रही है, बल्कि इससे आरोपियों को भी लाभ मिलने की आशंका है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि खाकी वर्दी की आड़ में अदालत के आदेशों की अनदेखी अब किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।

पहला मामला मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी थाना क्षेत्र के गढ़ुआ चौक का है। सितंबर 2021 में पुलिस ने रोशन कुमार को स्मैक और लोडेड पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया था। इस केस में उस समय के थाना प्रभारी अरविंद पासवान, डीएसपी विपिन नारायण शर्मा और जांच अधिकारी विवेकानंद सिंह समेत छह पुलिस अधिकारियों को गवाह बनाया गया था। चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद ये अधिकारी करीब साढ़े चार साल तक कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंचे।दूसरा मामला सदर थाना क्षेत्र की खबरा भेल कॉलोनी से जुड़ा है। अगस्त 2020 में पुलिस ने एटीएम फ्रॉड के छह आरोपियों को एक किलो हशीश के साथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में भी सूचक रघुवीर सिंह और जांच अधिकारी राजेश कुमार यादव सहित छह पुलिस अधिकारियों को गवाही देनी थी, लेकिन करीब साढ़े पांच साल बीत जाने के बाद भी वे अदालत में पेश नहीं हुए।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि NDPS जैसे संवेदनशील मामलों में जांच अधिकारी और सूचक की गवाही सबसे अहम साक्ष्य होती है। ऐसे में अधिकारियों का जानबूझकर अनुपस्थित रहना न केवल अनुशासनहीनता है बल्कि न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ भी है।अदालत ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वारंट जारी किए गए सभी 12 पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित कर उन्हें अदालत में पेश कराया जाए। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख भी तय कर दी है और उम्मीद जताई है कि संबंधित अधिकारी इस बार अदालत में उपस्थित होंगे।

