
पटना, 11 मार्च (अविनाश कुमार) मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान से चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर अली खमेनेई की मौत स्वीकार कर ली है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि के बावजूद इस घटना को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनसे पूरे क्षेत्र की राजनीति और युद्ध की दिशा पर नया रहस्य छा गया है।जानकारी के अनुसार 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए थे।

इसके अगले ही दिन ईरानी मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि करते हुए 40 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर दी। यह घटनाक्रम इसलिए भी हैरान करने वाला माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका ने अपने हमले में खामेनेई को सीधे निशाना बनाने की बात नहीं कही थी।सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि 28 फरवरी को ही उनकी मौत हो गई थी, तो 11 मार्च तक उनका अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया गया। आम तौर पर ईरान में बड़े धार्मिक नेताओं के अंतिम संस्कार जल्द कर दिए जाते हैं, लेकिन इस मामले में न तो शव की कोई आधिकारिक तस्वीर जारी की गई है और न ही कोई वीडियो सामने आया है।

सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें जरूर वायरल हुईं, लेकिन उन्हें एआई से बनाई गई तस्वीरें बताया जा रहा है।इस बीच ईरान की सरकार बेहद संगठित तरीके से काम करती दिखाई दे रही है। लीडरशिप काउंसिल ने तुरंत सक्रिय होकर एलिरेज आरफी को कार्यवाहक सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी सौंप दी है।ईरान ने साफ कहा है कि वह युद्ध में किसी भी हालत में आत्मसमर्पण नहीं करेगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि यदि कभी युद्धविराम हुआ भी तो वह केवल ईरान की शर्तों पर होगा। सुप्रीम लीडर की मौत के बाद भी ईरान का यह आत्मविश्वास कई विश्लेषकों के मन में यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या असलियत कुछ और है और क्या खामेनेई की स्थिति को लेकर अब भी रहस्य बना हुआ है।

