
पटना, 15 मार्च (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। करीब दो दशकों से सत्ता के केंद्र में रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा नामांकन और दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका की चर्चाओं ने पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व मंत्री शिवानंद तिवारी के एक लंबे फेसबुक पोस्ट ने इस बहस को और तेज कर दिया है।शिवानंद तिवारी ने अपने पोस्ट में दावा किया है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से ही होगा और पार्टी के भीतर सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे दिखाई दे रहा है।

उन्होंने लिखा कि पहले दो उपमुख्यमंत्रियों की व्यवस्था को बदलकर भाजपा ने केवल सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया है और उनके पास गृह विभाग भी है, जो उनके बढ़ते राजनीतिक कद का संकेत देता है।तिवारी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हालिया ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान सामने आई तस्वीरों का भी जिक्र किया। पूर्णिया, सहरसा, अररिया और कटिहार में आयोजित कार्यक्रमों में कई बार नीतीश कुमार को सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखते हुए देखा गया। तिवारी के अनुसार यह महज औपचारिकता नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश हो सकता है कि सम्राट को भविष्य के नेता के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।उन्होंने यह भी लिखा कि कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है कि यह पूरी राजनीतिक प्रक्रिया स्वयं नीतीश कुमार की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

शिवानंद तिवारी ने अपने पोस्ट में बिहार की राजनीति के ऐतिहासिक ‘लव-कुश’ समीकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कुर्मी और कुशवाहा समुदायों के इस सामाजिक गठजोड़ ने ही नीतीश कुमार की राजनीति को मजबूती दी। 1994 में गांधी मैदान में समता पार्टी की स्थापना इसी सामाजिक आधार को मजबूत करने के लिए की गई थी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार सत्ता का शांतिपूर्ण और सहज हस्तांतरण चाहते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सम्राट चौधरी सबसे आगे माने जा रहे हैं, लेकिन भाजपा के भीतर नित्यानंद राय, मंगल पांडे और दिलीप जायसवाल जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। फिलहाल बिहार की राजनीति में इस सियासी उत्तराधिकार को लेकर अटकलें चरम पर हैं।

