
बक्सर, 15 मार्च (विक्रांत) डुमरांव नगर का ऐतिहासिक पुराना तालाब, जिसे आज छठिया पोखरा के नाम से जाना जाता है, इन दिनों विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर चर्चा के केंद्र में है। करीब डेढ़ दशक में इस पोखरा के विकास के नाम पर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है। नतीजतन यह स्थल आज नगर का प्रमुख आकर्षण बन गया है और यहां से गुजरने वाले लोग इसकी मनोहारी छटा देखकर ठहरने को मजबूर हो जाते हैं।पोखरा के चारों कोनों पर मंदिर स्थित हैं, जो इसकी धार्मिक पहचान को और मजबूत करते हैं। उत्तरी कोने पर नव निर्मित पुस्तकालय भवन और सार्वजनिक शौचालय मौजूद है, जबकि पूर्वी दिशा में बच्चों के लिए चिल्ड्रेन पार्क बनाया गया है।

पोखरा के किनारे करीब एक-तिहाई हिस्से में पक्का घाट और सीढ़ियों का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा पानी की आपूर्ति के लिए बोरिंग की व्यवस्था तथा युवाओं को आकर्षित करने के लिए सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया है। सेल्फी प्वाइंट पर रोजाना बच्चों और युवाओं की भीड़ लगी रहती है।मुख्यमंत्री विकास योजना के तहत करीब 64 लाख रुपये की लागत से चिल्ड्रेन पार्क और पोखरा के किनारे आने-जाने के लिए सड़क का निर्माण हुआ है। वहीं पूर्व राज्यसभा सदस्य सह जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह के सांसद निधि से लगभग 30 लाख रुपये से घाट और सीढ़ियों का निर्माण कराया गया। तत्कालीन सांसद सह पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने भी सांसद निधि से करीब 15 लाख रुपये खर्च कर पोखरा के किनारे घाट बनवाया। स्थानीय तत्कालीन विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने विधायक निधि से करीब 14 लाख रुपये की लागत से पुस्तकालय भवन बनवाया, हालांकि इसका उद्घाटन अब तक नहीं हो सका है।

नगर परिषद की ओर से सार्वजनिक शौचालय और चारों कोनों पर प्रकाश व्यवस्था की गई है। स्थानीय नागरिकों के सहयोग से पश्चिमी दिशा के मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया गया।छठिया पोखरा के निवासी सोनू राय और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह पोखरा डुमरांव में विकास का अनूठा उदाहरण बन चुका है। गौरतलब है कि इस तालाब का निर्माण डुमरांव राज परिवार ने कराया था। छठ पूजा के दौरान यहां का दृश्य बेहद अलौकिक होता है, जब श्रद्धालुओं की भीड़ और दीपों की जगमगाती रोशनी पोखरा के जल में आस्था का अद्भुत प्रतिबिंब प्रस्तुत करती है।

