
पटना, 17 मार्च (सेंट्रल डेस्क) पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बजते ही बिहार की राजनीति में भी जबरदस्त हलचल तेज हो गई है। सोमवार को राज्यसभा की पांच सीटों पर हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने क्लीन स्वीप कर सियासी ताकत का बड़ा प्रदर्शन किया। चार सीटें पहले से तय मानी जा रही थीं, लेकिन कड़ी टक्कर वाली एक सीट भी एनडीए ने अपने रणनीतिक कौशल से जीत ली।इस जीत के बाद बिहार की राजनीति में नया समीकरण उभरता दिख रहा है।

अब राज्यसभा की 16 सीटों में से 12 पर एनडीए का कब्जा हो चुका है, जो उसकी बढ़ती ताकत का स्पष्ट संकेत है। लोकसभा चुनाव 2024 में 40 में से 30 सीटें जीतने और 2025 विधानसभा चुनाव में 243 में से 202 सीटों पर कब्जा जमाने के बाद गठबंधन और मजबूत हुआ है।सबसे बड़ा बदलाव भाजपा के बढ़ते वर्चस्व के रूप में सामने आया है। कभी ‘बड़ा भाई’ मानी जाने वाली जदयू अब पीछे छूटती दिख रही है। विधानसभा और राज्यसभा दोनों में भाजपा ने अपने सहयोगी दलों से बढ़त बना ली है।

सूत्रों की मानें तो भाजपा अब बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। चर्चा है कि मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जिससे सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ हो। संभावित चेहरों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है, हालांकि कई अन्य नाम भी चर्चा में हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा, जहां पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बन सकता है।

